दक्षिण अमेरिका महाद्वीप की सामान्य जानकारी | South America in Hindi

 

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दक्षिण अमेरिका महाद्वीप की सामान्य जानकारी | South America in Hindi

दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के बारे मे सामान्य जानकारी (South America)

  • इसे "पक्षियों का महाद्वीप" तथा "लैटिन अमेरिका" भी कहते है। 
  • यह सर्वाधिक वन क्षेत्रफल वाला महाद्वीप है। 
  • दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप का कुल क्षेत्रफल :- 1 करोड़ 78 लाख 40 हजार वर्ग किमी है। 
  • दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप की कुल जनसंख्या :- 42 करोड़ 35 लाख है। 
  • यह क्षेत्रफल की दृष्टि से चौथा बड़ा महाद्वीप है। 
  • यह जनसंख्या की दृष्टि से पाँचवा बड़ा महाद्वीप है। 
  • दक्षिणी अमेरिका में कुल 14 देश है। 
  • इस महाद्वीप का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा देश - ब्राजील है। 
  • इस महाद्वीप का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा देश - फॉकलैण्ड  है। 
  • इस महाद्वीप का जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा देश - ब्राजील और कोलम्बिया है। 
  • इस महाद्वीप का जनसंख्या की दृष्टि से सबसे छोटा देश - सूरीनाम है। 


दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप की प्रमुख पर्वतमाला :- 

1. एण्डीज पर्वतमाला :- 

  • यह विश्व की सबसे लम्बी पर्वतमाला है। 
  • इसकी लम्बाई - 7200 किमी है। 
  • इसका विस्तार :-वेनेजुएला , पेरू , इकवेडोर , उरूग्वे , चिली  कोलंबिया , बोलीविया , अर्जेन्टीना में है। 
  • एण्डीज पर्वतमाला का  सर्वोच्च पर्वतशिखर - एकांका गुआ है। इसकी औसत ऊँचाई 6962 मीटर है। यह अर्जेन्टीना देश में स्थित है। 
  • एण्डीज पर्वतमाला में तीन प्रमुख सक्रिय ज्वालामुखी स्थित है- 

(I) कोटोपैक्सी (इकवेडोर देश) :- यह विश्व का सर्वाधिक सक्रीय ज्वालामुखी है। इसकी औसत ऊंचाई 5897 मीटर है। 

(II) चिंबरेजो (इक्वेडोर देश) :- इसकी औसत ऊंचाई 6268 मी है। 

(III ) ओजस-डेल-सलाडो (चिली और अर्जेन्टीना देश ) :- यह विश्व का सबसे ऊँचाई वाला सक्रिय ज्वालामुखी है। इसकी औसत ऊँचाई 6893 मी है। 


दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप के प्रमुख घास के मैदान  :- 

गर्म घास के मैदान :- 
  1. कैम्पोस घास का मैदान (ब्राजील)
  2. सेल्वस घास का मैदान (ब्राजील)
  3. लानोस घास का मैदान ( वेनेजुएला)
ठण्डे / शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान :- 
  1. पम्पास घास का मैदान (अर्जेन्टीना देश)
1. पम्पास (अर्जेन्टीना) :- 
यह ठंडा घास का मैदान है। 
यहाँ पराना नदी बहती है। 
यहाँ गेहूँ व मक्का की कृषि अधिक की जाती है। 
यहाँ मक्का के जो बागान मिलते है, उन्हें "स्टांशिया" कहते है। 

2. कैम्पोस (ब्राजील देश) :- 
इस मैदान को "घास भूमि" कहते है। 
यह एक गर्म घास का मेदान है। 
यहाँ " अल्फ़ा-अल्फ़ा " नामक घास मिलती है। 
इसमें टेरारोसा मिट्टी मिलने के कारण कॉफी व कहवा की कृषि अधिक की जाती है। 
यहाँ कॉफी के बड़े बागान मिलते है , जिन्हे 'फजेण्डा' कहते है। 
यहाँ "येर्बा" नामक वनस्पति मिलती है , जो कि चाय की तरह पेय पदार्थ के रूप में काम में आती है। 
इस मैदान में 'अमेजन नदी बहती है। जो कि लम्बाई के आधार पर विश्व की दूसरी बड़ी नदी और जल आयतन के आधार पर पहली बड़ी नदी है। इस नदी में विश्व का सबसे बड़ा सरीसर्प "एनाकोंडा" मिलता है। 


3. सेल्वास (ब्राजील देश ) :- 
यहाँ सेल्वा /सेल्व वृक्ष मिलते है। जो कि अमेजन वनो के अंतर्गत आते है।  और इन्हे "पृथ्वी के फेफड़े / The Lungs of Earth कहते है। 
यहाँ विश्व की सबसे हल्की वनस्पति - "वाल्सा" मिलती है। 
इस घास के मैदान में रबड़ के वृक्ष अधिक मिलते है। इसलिए इस घास के मैदान को "विश्व के रबड़ का घर" कहते है। 
यहाँ विश्व की सबसे अधिक ऊँचाई वाली वनस्पति 'रोजवुड' मिलती है। 

NOTE :- सेल्वास व कैम्पोस घास के मैदान में "चीता (panther)" की प्रजाति "प्यूमा और जगुआर" मिलती है। 


4. लानोस (वेनेजुएला देश ) :- 
इस घास के मैदान में ओरीनिको नदी बहती है। यहाँ ओरिनिको नदी की सहायक नदी 'कैरो नदी' विश्व का सबसे अधिक ऊँचाई वाला जलप्रपात "एंजिल/एंजेल" बनाती है। 
इसी मैदान में "मैराकाइबो झील" मिलती है। जिसके बेसिन में पेट्रोलियम के भंडार मिलते है। 

NOTE - संचित पेट्रोलियम भंडार की दृष्टि से 'वेनेजुएला' विश्व में पहले स्थान पर है। 
NOTE :- पेट्रोलियम उत्पादन की दृष्टि से विश्व का पहला स्थान "सऊदी अरब (एशिया)" रखता है। 

उत्तरी अमेरिका महाद्वीप की सामान्य जानकारी | North America in Hindi

 

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उत्तरी अमेरिका महाद्वीप की सामान्य जानकारी | North America in Hindi

उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के बारे में सामान्य जानकारी 

  • उत्तरी अमेरिका महाद्वीप की खोज का श्रेय 'कोलम्बस' को जाता है। इन्होने 1492 में इस महाद्वीप की खोज की। 
  • इस महाद्वीप पर पहला कदम इटली के 'अमेरिगो वेस्पूची' ने 1512 में रखा। इन्ही के नाम पर "मार्टिन वाल्ट सिम्युलर" तथा "M. रिंगमैन" ने इस महाद्वीप का नाम "अमेरिका" रख दिया। 
  • उत्तरी अमेरिका महाद्वीप क्षेत्रफल की दृष्टि से तीसरा बड़ा महाद्वीप है। 
  • यह जनसंख्या की दृष्टि से चौथा बड़ा महाद्वीप है। 
  • यहाँ कुल देश 23 है। एंटीगुआ एवं बरबूडा,बहामास, बारबाडोस, बेलिज, कनाडा, कोस्टारिका, क्यूबा, डोमिनिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, एल-साल्वाडोर, ग्रेनाडा, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, जमैका, मैक्सिको, निकारागुआ, पनामा, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट विन्सेंट एंड द ग्रेनाडी, सेंट लूसिया, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, संयुक्त राज्य अमेरिका।
  • उत्तरी अमेरिका का कुल क्षेत्रफल - 2,47,09,000 वर्ग किमी
  • इस महाद्वीप का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा देश - "कनाडा" है।
  • इस महाद्वीप का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा देश - "सेंट किट्स एंड नेविस" है।
  • उत्तरी अमेरिका महाद्वीप की कुल जनसंख्या - 57 करोड़
  • इस महाद्वीप का जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा देश - "USA"(संयुक्त राज्य अमेरिका) 
  • इस महाद्वीप का जनसंख्या की दृष्टि से सबसे छोटा शहर - "मैक्सिको सिटी"
  • 100 डिग्री पश्चिमी देशांतर उत्तरी अमेरिका को दो भागों में बाँटता है। 
  • 49०30' उत्तरी अक्षांश भी उत्तरी अमेरिका महाद्वीप को दो भागो में बाँटता है। यह अक्षांश कनाडा और USA की सीमा रेखा बनाता है। 
  • सुलिवास की खान (कनाडा) :- यह विश्व की सबसे बड़ी जस्ते की खान है। 

उत्तरी अमेरिका की प्रमुख पर्वतमाला :-

1. रॉकीज पर्वतमाला :- 
  • यह पर्वतमाला उत्तरी अमेरिका के पश्चिम में स्थित है। 
  • इसका विस्तार कनाडा और USA देश में है। 
  • रॉकीज पर्वतमाला की लम्बाई - 3000 किमी / 4629 मील  है। 
  • इस पर्वतमाला का सर्वोच्च पर्वतशिखर "माउंट मैकिन्ले या माउंट देनाली " है। इसकी औसत ऊँचाई 6190 मी. है। इसका देनाली नाम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दिसम्बर 2015 में दिया। यह एक सक्रिय ज्वालामुखी है। यह अलास्का में स्थित है। 
  • रॉकीज पर्वतमाला पर चलने वाली गर्म स्थानीय पवन ' चिनूक ' है, जिसे "हिमभक्षी" कहते है।

उत्तरी अमेरिका महाद्वीप की प्रमुख मीठे पानी की झीले :-

1. सुपीरियर झील ( USA देश) :-
यह विश्व की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। 
इस झील के तट पर 'डुलुथ' शहर स्थित है , जो कि लौह इस्पात का बड़ा केंद्र है। 

2. मिशिगन झील (USA) :- 
इस झील के तट पर 'शिकांगो' शहर स्थित है। जहाँ विश्व की सबसे बड़ी मांस मंडी स्थित है। 

3. ईरी झील 
4. ह्यूरोन झील 
NOTE :- ह्यूरोन तथा ईरी झील के तट पर 'डेट्रोइड' शहर स्थित है। जिसे विश्व के मोटरयानो का शहर कहते है। 
5. ओन्टेरियो झील :- यह नदी इन पाँचो में से सबसे छोटी मीठे पानी की झील है। 
NOTE :- सेन्ट लॉरेन्स नदी '' नियाग्रा जलप्रपात " बनाती है। जो कि ओन्टेरियो  तथा ईरी झील के मध्य में स्थित है। 

नोट:- इन 5 झीलों को "महान झील प्रदेश " या "अंगुलीकार झील (FINGER LAKE) कहते है। 

6. ग्रेट बीयर झील (कनाडा) :- कनाडा का 'रेडियम' शहर इस झील के तट पर स्थित है। 
7. ग्रेट स्लेप झील (कनाडा)
8. अथाबास्का झील (कनाडा) :- इसके तट पर यूरेनियम शहर स्थित है। 
NOTE :- विश्व में कनाडा का यूरेनियम उत्पादन में दूसरा स्थान है। 
9. विनिपेग झील :-  इसके तट पर 'विनिपेग' शहर स्थित है।  जहाँ विश्व की सबसे बड़ी गेहूँ मंडी है। 

नोट : -
 कनाडा देश की प्रमुख मीठे पानी की झीलों का उत्तर से दक्षिण में व्यवस्थित क्रम :-
1. ग्रेट बीयर झील 
2 ग्रेट स्लेप झील 
3.अथाबास्का झील 
4. विनिपेग झील 


अफ्रीका महाद्वीप की सामान्य जानकारी | Africa Mahadeep in Hindi

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अफ्रीका महाद्वीप के बारे में सामान्य जानकारी 

  • विश्व का क्षेत्रफल और जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप "अफ्रीका महाद्वीप" है। 
  • अफ्रीका महाद्वीप का क्षेत्रफल :- 3,03,70,000 वर्ग किमी 
  • अफ्रीका महाद्वीप की जनसँख्या :- 1 अरब 27 करोड़ 
  • अफ्रीका महाद्वीप के उपनाम :- (I) अंध महाद्वीप (शैक्षिक और आर्थिक स्तर पर होने के कारण इसे अंध महाद्वीप कहते है। )       (II) मानव का जन्म स्थल   (III) जनजातियों का महाद्वीप   (IV) पठारों का महाद्वीप। 
  • इसका क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा देश :- अलजीरिया 
  • इसका जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा देश :- नाइजीरिया
  • जनसंख्या + क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा देश - सेसेल्स देश ( यह हिन्द महासागर में स्थित है। )
  • विश्व का एकमात्र महाद्वीप जिसका विस्तार दोनों गोलार्द्ध में है। (उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में )
  • इस महाद्वीप में विश्व के सर्वाधिक देश - 54 देश स्थित है। 
  • दुनिया की एकमात्र नदी जो भूमध्य रेखा को दो बार काटती है - कांगो नदी ( यही अफ्रीका में स्थित है। )
  • विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल " सहारा मरुस्थल " है। जिसका विस्तार अफ्रीका महाद्वीप के नाइजीरिया और सूडान देशो में है। इसका क्षेत्रफल 84 लाख वर्ग किमी है। 
  • इस महाद्वीप को "लाल सागर व स्वेज नहर" एशिया महाद्वीप से अलग करते है। 
  • इस महाद्वीप को "भूमध्य सागर व जिब्राल्टर जल संधि" यूरोप से अलग करते है।
  • इस महाद्वीप में स्थित जंजीबार द्वीप को "विश्व के मसालों का द्वीप" कहते है। यह हिन्द महासागर में स्थित है। 
  • इस महाद्वीप में बहने वाली लिम्फोफो नदी मकर रेखा को दो बार काटती है। 
  • अफ्रीका शब्द बरबर भाषा का शब्द है , जो " इफ्री या इफ्रान" से बना है , जिसका अर्थ "गुफा" है। 
  • इस महाद्वीप की सबसे लम्बी पर्वतमाला "एटलस" है , जिसका विस्तार मोरक्को , अलजीरिया और ट्यूनेशिया देश में है। 
  • एटलस पर्वतमाला का सर्वोच्च शिखर 'टूबेकल' है , जिसकी ऊँचाई 4167 मी. है , जो इस महाद्वीप का दूसरा सर्वोच्च शिखर है। 
  • अफ्रीका महाद्वीप का सर्वोच्च शिखर " किलिमंजारो " है , जो कि तंजानिया देश में स्थित है। 
  • मोजाम्बिक चैनल अफ्रीका महाद्वीप को मेडागास्कर द्वीप से अलग करता है।  
  • इस महाद्वीप के कंटागा के पठार (जाम्बिया देश ) पर जाम्बेजी नदी बहती है। जो विक्टोरिया जल प्रपात बनाती है। 
  • यहाँ दो अन्य पर्वतमाला ' स्वार्टबर्ग और ड्रेकेन्सबर्ग ' दक्षिण अफ्रीका के पूर्व में स्थित है। इसके मध्य में केप डॉक्टर नामक स्थान पर ठंडी स्थानीय पवन चलती है जिसे "टेबल क्लॉक" कहते है। 


अफ्रीका महाद्वीप के प्रमुख मरुस्थल 

1. सहारा मरुस्थल :- 

  • यह विश्व का सबसे बड़ा मरुस्थल है। 
  • इसका क्षेत्रफल 84 लाख वर्ग किमी है। 
  • अफ्रीका महाद्वीप में सहारा मरुस्थल का सर्वाधिक विस्तार ' अलजीरिया तथा सूडान ' देश में है। 
  • सहारा मरुस्थल के उत्तर-पश्चिम में "एटलस पर्वतमाला " स्थित है। 
  • इस मरुस्थल में विश्व के दो बड़े गर्म स्थान स्थित है। 
  • (I) अल अजीजिया - यह लिबिया देश में स्थित है। यह विश्व का दूसरा सबसे गर्म स्थान है। 
  • (II) शहडोल - यह इथोपिया देश में स्थित है। यह विश्व का तीसरा सबसे गर्म स्थान है। 
  • NOTE:- विश्व का पहला सबसे गर्म स्थान :- मृत घाटी (USA) में स्थित है। 
  • इस मरुस्थल में विश्व की लम्बी नदी "नील नदी" बहती है। इसकी लम्बाई 6600 किमी है। इस नदी को दो भागो  बाँटा गया है।  (I) सफ़ेद नील - इसका उदगम स्थल विक्टोरिया झील है।  (II) ब्लू नील - इसका उदगम स्थल ताना झील है। ताना झील 'इथोपिया देश' में स्थित है। विक्टोरिया झील 'युगाण्डा , केन्या , तंजानिया देश की सीमा रेखा बनाती है।
  • नील नदी पर "आसवान बाँध"  मिश्र देश में स्थित है। जो कि विश्व के बड़े बाँधो में से एक है। इस बांध के बाह्य क्षेत्र में कपास की खेती की जाती है। कपास की खेती करने वाले किसानो को यहाँ "फैल्लाह"  कहते है। 
  • सहारा मरुस्थल में (सूडान देश) में पठारी क्षेत्र स्थित है , जिसे 'सूड़ क्षेत्र' कहा जाता है। 

2. कालाहारी मरुस्थल :-

यह विश्व का सबसे गर्म मरुस्थल है। 

इस मरुस्थल में अफ्रीका महाद्वीप की प्रमुख जनजाति "बुशमैन" पायी जाती है। 

बुशमैन जनजाति के घर को "स्योम" कहते है। 

यह एक 'चींटी खोर' जनजाति है जो केले और शहद खाना पसंद करती है। 

इस मरुस्थल में सबसे बड़ा व तेज दौड़ने वाला पक्षी शुतुरमुर्ग मिलता है। 

इस मरुस्थल में ओकोवांगो नदी बहती है, जिसे 'कालाहारी का रत्न ' कहते है। 

 


एशिया महाद्वीप के बारे में सामान्य जानकारी | ASIA MAHADEEP in Hindi

 
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 एशिया महाद्वीप के बारे में सामान्य जानकारी | ASIA MAHADEEP in Hindi 

एशिया महाद्वीप की सामान्य जानकारी | ASIA MAHADEEP in Hindi 

  • क्षेत्रफल व जनसंख्या दोनों की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप 'एशिया महाद्वीप' है। 
  • एशिया महाद्वीप क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का लगभग 30 % भाग है। 
  • एशिया महाद्वीप का क्षेत्रफल 4,44,44,000 वर्ग किमी है। 
  • एशिया महाद्वीप में 49 देश है। अज़रबेजान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, इण्डोनेशिया, इजराइल, ईराक, ईरान, उज़्बेकिस्तान, ओमान, कज़ाख़स्तान, क़तर, कम्बोडिया, किरगिस्तान, कुवैत, उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, चीन, तिमोर-लेस्टे, जापान, जॉर्जिया, जॉर्डन, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, थाईलैंड, नेपाल, पाकिस्तान, फिलीपींस, बहरीन, बांग्लादेश, ब्रुनेई दारुस्सलाम, भारत, भूटान, मंगोलिया, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, यमन, रूस, लाओस, लेबनॉन, वियतनाम, संयुक्त अरब अमीरात, साईप्रस, सौउदी अरब, सिंगापूर, सीरिया, श्रीलंका। 
  • यहाँ विश्व की लगभग 60% जनसंख्या निवास करती है। 
  • एशिया शब्द की उत्पत्ति हिब्रू भाषा के 'आसु' शब्द से हुई है , जिसका शाब्दिक अर्थ - "उदित सूर्य" है।  
  • एशिया महाद्वीप का उपनाम :- सभी धर्मों  उदय भूमि / महाद्वीपों का महाद्वीप / नदी सभ्यताओं का पालना / भूत व भविष्य का महाद्वीप। 
  • एशिया महाद्वीप की तटवर्ती सीमा रेखा की लम्बाई :- 6900 किमी 
  • एशिया महाद्वीप की उत्तर से दक्षिण की लम्बाई :- 6440 किमी 
  • एशिया महाद्वीप की पूर्व से पश्चिम की लम्बाई :- 9650 किमी 
  • एशिया महाद्वीप को यूराल पर्वतमाला तथा कैस्पियन सागर यूरोप से अलग करते है। 
  • एशिया महाद्वीप को स्वेज नहर तथा लाल सागर अफ्रीका से अलग करते है। 
  • एशिया महाद्वीप को बेरिंग जलसंधि उत्तरी अमेरिका से अलग करते है। 
  • एशिया के पूर्व में प्रशांत महासागर, उत्तर में आर्कटिक महासागर और दक्षिण में हिन्द महासागर  स्थित है। 
  • एशिया महाद्वीप उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित विश्व का सबसे बड़ा महाद्वीप है , जिससे होकर तीन मुख्य अक्षांशीय आर्कटिक , कर्क और विषुवत गुजरते है। 
  • 90 डिग्री पूर्वी देशांतर रेखा एशिया के लगभग मध्य से गुजरती है। 
  • इसमें अति प्राचीन काल के स्थलखंड अंगारलेंड (जो की रूस व चीन है।) और गोंडवाना लैंड (जो की प्रायद्वीपीय भारत है ) स्थित है। 
  • इसके स्थलरुद्ध (जो कि समुद्र से टच नहीं होते है ) देश निम्नलिखित है :- कज़ाकिस्तान (सबसे बड़ा स्थलरुद्ध देश) , मंगोलिया (दूसरा सबसे बड़ा स्थलरुद्ध देश) , अफगानिस्तान , तुर्केमिनिस्तान ,नेपाल , भूटान , उज्बेकिस्तान , किर्गिस्तान , तजाकिस्तान एवं लाओस(यह दक्षिण-पूर्वी एशिया का एकमात्र स्थलरुद्ध देश है )।  
  • एशिया में तीन मुख्य प्रायद्वीप निम्नलिखित है :- अरब का प्रायद्वीप (यह विश्व का सबसे बड़ा प्रायद्वीप है ) , दक्कन का प्रायद्वीप व इंडोचीन का प्रायद्वीप। 
  • एशिया महाद्वीप में फिलीपींस द्वीप समूह के निकट विश्व का सबसे गहरा सागरीय गर्त प्रशांत महासागर में "मेरियाना गर्त (11,022 मी. गहरा ) स्थित है। 
  • इसमें विश्व का सबसे ऊँचा पर्वतशिखर - माउंट एवरेस्ट (औसत ऊंचाई 8848 मी. या 8850 मी. ) वृहद या महान हिमालय  स्थित है। 
  • पामीर का पठार , विश्व का सबसे ऊँचा पठार है। इसे 'विश्व की छत' कहते है। यह मध्य एशिया के देश "उज्बेकिस्तान , तजाकिस्तान , किर्गिस्तान " में स्थित है। 
  • ट्रांस साइबेरियन रेलमार्ग :- यह विश्व का सबसे लम्बा रेलमार्ग है।  इसकी लम्बाई 9289 किमी है। यह ब्लाडी वोस्टक (एशिया) से लेकर सेंटपीट्सबर्ग (यूरोपियन रूस ) तक है। इसका विकास 1891-1916 तक किया गया। 
  • कैस्पियन सागर झील :- विश्व की सबसे बड़ी झील है। इसका क्षेत्रफल 3,71,000 वर्ग  किमी है।  यह ईरान , अजरबेजान , कजाकिस्तान , तुर्केमिनिस्तान तथा रूस देश की सीमा बनाती है। 

रचना के आधार पर वाक्य परिवर्तन | rachna vaky parivartan

 रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते है - सरल वाक्य , मिश्र वाक्य , संयुक्त वाक्य।  इन वाक्यों को सुविधा अनुसार आपस में एक दूसरे में परिवर्तित किया जा सकता है।  इसलिए हिंदी व्याकरण में आज हम आपको इस पोस्ट में रचना के आधार पर वाक्य परिवर्तन  के बारे में संक्षिप्त जानकारी देंगे। 


रचना के आधार पर वाक्य परिवर्तन 


1. सरल वाक्य से संयुक्त वाक्य में वाक्य परिवर्तन :- 


सरल वाक्य  संयुक्त वाक्य
वह खाना खाकर सो गया।  उसने खाना खाया और सो गया।  
इतना कहने पर भी वह नहीं आया।  इतना कहा पर वह नहीं आया। 
प्राचार्य ने उसे अनुशासन भंग करने पर दण्डित किया।   उसने अनुशासन भंग किया , इसलिए प्राचार्य ने उसे दंडित किया।   
उसे पुरस्कार पाने के लिए परिश्रम करना पड़ेगा। उसे परिश्रम करना पड़ेगा। वरना/ नहीं तो पुरस्कार नहीं पाएगा। 
उसे अपनी कमी पूरी करने के लिए परिश्रम करना चाहिए। 
 
उसे परिश्रम करना चाहिए और इस तरह अपनी कमी पूरी करनी चाहिए। 
वह मृत्युदंड के भय से झूठ बोलता रहा।  उसे मृत्युदंड का भय था , इसलिए वह झूठ बोलता रहा।  
कड़ी मेहनत के बावजूद वह सफल न हो सका। उसने कड़ी मेहनत की , परन्तु वह सफल न हो सका। 
दुर्भाग्य से वह परीक्षा में बैठ न सका।   उसका दुर्भाग्य था और इसलिए वह परीक्षा में बैठ न सका।   
 उसने ऐसा काम करके बदनामी कमाई।     उसने ऐसा काम किया और बदनामी कमाई। 
कपडे उतारकर वह नदी में कूद पड़ा। उसने कपडे उतारे और वह नदी में कूद पड़ा। 
सब कुछ पाने पर भी वह अपने में संतुष्ट नहीं था। उसने सब कुछ पा लिया , पर वह अपने में संतुष्ट नहीं हुआ। 
उसके सीटी बजाने पर खेल रुक गया। उसने सीटी बजाई और खेल रुक गया।  
वर्षा आती देख हमने एक झोपड़ी में शरण ली। हमने वर्षा आती देखी और एक झोपड़ी में शरण ली। 
दंड से बचने के लिए वह भाग गया। वह दंड से बचना चाहता था, इसलिए भाग गया।  
अपने ऊपर विपत्ति  देखकर वह वहां से खिसक गया। उसने अपने ऊपर विपत्ति आती देखी और वह वहां से खिसक गया।  
पंगु होने के कारण वह घोड़े पर नहीं चढ़ सकता। वह पंगु है , इसलिए घोड़े पर नहीं चढ़ सकता। 

2. संयुक्त वाक्य से सरल वाक्य में वाक्य परिवर्तन :-


संयुक्त वाक्य  सरल वाक्य
वह बच्चा ही तो था , पर था चतुर। बच्चा होने पर भी वह था चतुर। 
देर मत करो , नहीं तो या वरना गाड़ी छूट जाएगी। देर करने पर गाड़ी छूट जाएगी। 
वे लोग निर्धन थे और कष्ट भोगते रहते थे।  वे निर्धन लोग कष्ट भोगते रहते थे।   
मैंने उसे बुलाया पर उसने कोई उत्तर नहीं दिया। मेरे बुलाने पर भी उसने कोई उत्तर नहीं दिया।  
न केवल उसे पैसा मिला , अपितु प्रोत्साहन भी मिला। पैसा मिलने के अलावा उसे प्रोत्साहन भी मिला। 
उसने घर का काम कर लिया और पुस्तक बंद कर दी। उसने घर का काम करके पुस्तक बंद कर दी।
हमें आहार लेना चाहिए नहीं तो जी न सकेंगे।  हमें जीने के लिए आहार लेना चाहिए। 
न रहेगा बांस न रहेगी बाँसुरी। बाँस और बाँसुरी दोनों ही नहीं रहेंगे।   
स्याही सुख गई और मैं लिख न सका।    स्याही सुख जाने प् मैं लिख न सका। 
वह प्रतिदिन अभ्यास करता था , इसलिए प्रवीण हो गया। प्रतिदिन अभ्यास करने के कारण वह प्रवीण हो गया। 
यह कोट फटा-पुराना है इसलिए यह मेरा नहीं हो सकता। यह फटा-पुराना कोट मेरा नहीं हो सकता। 
वह दुर्बल होता जा रहा था , इसलिए डॉक्टर को दिखाना पड़ा। उसके दुर्बल होते जाने के कारण उसको डॉक्टर को दिखाना पड़ा।
मालिक आया और घोडा हिनहिनाने लगा।   
मालिक के आने पर घोडा हिनहिनाने लगा। 
बिल का भुगतान कर दो नहीं तो माल वापस। बुल का भुगतान न करने पर तुम्हें माल वापस करना होगा।  
वह धनी है पर लोग ऐसा नहीं समझते।  लोग उसे धनी नहीं समझते। 
जल्दी चलो , नहीं तो पकडे जाओगे। जल्दी न चलने पर पकडे जाओगे। 


3. सरल वाक्य से मिश्र वाक्य में वाक्य परिवर्तन :


सरल वाक्य  मिश्र वाक्य
वह छोटा लड़का है। वह जो लड़का है छोटा है। 
इसी बच्चे को बैल ने सींग मारा था। यह वही बच्चा है जिसको बैल ने सींग मारा था। 
गरीबों की सहायता करने वाले धर्मात्मा होते है। जो गरीबों की सहायता करते है वे धर्मात्मा होते है।   
वह मुझसे घर आने को कहता है।  वह मुझसे कहता है कि मेरे घर आओ। 
टोपीवाला बाबू कहीं जा रहा है। वह जो टोपीवाला बाबू है कहीं जा रहा है। 
उसने अपना दोष मान लिया। उसने मान लिया कि दोष उसका है। 
उसने परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए परिश्रम किया।  उसने परिश्रम किया ताकि परीक्षा उत्तीर्ण करे। 
आज शाम उससे मिलने का मेरा विचार है। मेरा विचार है कि आज शाम उससे मिला जाए। 
मैं तुम्हारे साथ खेलना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम्हारे साथ खेलूँ। 
यहाँ का प्रबंध अति त्रुटिपूर्ण है। यहाँ जो प्रबंध है वह अति त्रुटिपूर्ण है। 
सूर्य पूर्व से उदय होता है। जो सूर्य है वह पूर्व से उदय होता है। 
मुझे अपनी समस्या बताओ। मुझे बताओ कि तुम्हारी समस्या क्या है। 
मेरे लिए बैठने की कहीं जगह नहीं है। मेरे लिए कहीं जगह नहीं है जहाँ मैं बैठूँ। 
काम खत्म करके हम सैर करने निकल पड़े। जब काम खत्म हुआ तब हम सैर करने निकल पड़े। 
इतना धन रहते हुए भी वह स्वस्थ नहीं है। यघपि उसके पास इतना धन है तथापि वह स्वस्थ नहीं है। 
वह सेना में भर्ती होने योग्य नहीं है। वह इस योग्य नहीं है कि सेना में भर्ती हो सके।  

4. मिश्र वाक्य से सरल वाक्य में वाक्य परिवर्तन :-


मिश्र वाक्य  सरल वाक्य
यह निश्चित नहीं है कि वह कब आएगा। उसके आने का समय निश्चित नहीं है। 
घोषणा की गई कि लोग अपने-अपने हथियार मालखाने में जमा कर दें। घोषणा में लोगों से अपने-अपने हथियार मालखाने में जमा करने को कहा गया। 
वह उसी गाँव में मरा जिसमें पैदा हुआ था। वह अपने पैदाइशी गाँव में ही मरा। 
वह दिल ही क्या है जिस दिल में दर्द न हो। बेदर्द दिल दिल नहीं है। 
मैंने एक आदमी देखा जो अंधा था। मैंने एक अंधा आदमी देखा। 
उसने कहा कि मैं निर्दोष हूँ। उसने अपने को निर्दोष बताया।  
जो क्षण बीत गया वह सदा के लिए गया। बीता हुआ क्षण सदा के लिए गया।  
मेरा पास ऐसा कोई उपहार नहीं है जो मैं तुम्हें दे सकूँ। मेरे पास तुम्हें योग्य कोई उपहार नहीं है। 
जब तुम लौटकर आने पर मैं जाऊँगा। तुम्हारे लौटकर आने पर मैं जाऊँगा। 
यघपि वह गरीब है तथापि वह चोरी नहीं करता। गरीब होने पर भी वह चोरी नहीं करता। 
मुझे बताओ कि तुम कहाँ रहते हो। मुझे अपने रहने का स्थान बताओ। 
जो लोग अपने बल-बूते पर खड़े होते हैं वे जीवन में सफल होते हैं। अपने बल-बूते पर खड़े होने वाले जीवन में सफल रहते है। 
चीनी ऐसा खाद्य पदार्थ है जो सबसे महँगा है। चीनी सबसे महँगा खाद्य पदार्थ है।  
जहाँ श्याम रहता है वहीं राम भी रहता है। राम और श्याम एक ही जगह रहते है। 
ज्यों ही मैं वहाँ पहुँचा त्यों ही घंटा बचा। मेरे वहाँ पहुँचते ही घंटा बजा।  

5. संयुक्त वाक्य से मिश्र वाक्य में वाक्य परिवर्तन :-


संयुक्त वाक्य  मिश्र वाक्य
इसकी तलाशी लो और घड़ी मिल जाएगी।  यदि इसकी तलाशी लोगे तो घड़ी मिल जाएगी। 
करो या मरो। यदि नहीं करोगे तो मरोगे। 
मोहन एक पुस्तक चाहता था और वह उसे मिल गई। मोहन जो पुस्तक चाहता था वह उसे मिल गई। 
मैं वहाँ पहुँचा और तुरंत घंटा बजा। ज्यों ही मैं वहाँ पहुँचा त्योंही घंटा बजा। 
मनोहर या तो स्वयं आएगा या तार भेजेगा। यदि मनोहर स्वयं न आया तो तार भेजेगा। 
विनय चुस्त न हो पर है समझदार। यघपि विनय चुस्त नहीं है तथापि वह है समझदार। 
शेर घायल हुआ , परन्तु मारा नहीं गया। यघपि शेर घायल हो गया तथापि वह मारा नहीं गया।   
मुझे तार मिला और मैं तुरंत चल पड़ा। ज्योंही मुझे तार मिला त्योंही मैं चल पड़ा। 
दवा लो और बुखार काम हो जाएगा। यदि दवा लोगे तो बुखार कम हो जाएगा। 
मैं उसे चुप रहने को कहता रहा , पर उसने एक नहीं सुनी। यघपि मैं उसे चुप रहने को कहता रहा तथापि उसने एक नहीं सुनी। 
काम पूरा कर डालो , नहीं तो जुरमाना होगा। यदि काम पूरा नहीं करोगे तो जुरमाना होगा। 
वह विद्वान् बनना चाहता था , इसलिए बड़े-बड़े ग्रन्थ पढ़ता था। वह बड़े-बड़े ग्रन्थ पड़ता था ताकि विद्वान् बन जाए। 
वक्त निकल जाता है , पर बात याद रह जाती है।भले ही वक्त निकल जाता है ,फिर भी बात याद रह जाती है। 
पोत नष्ट हो गया ,तो भी यात्रियों को बचा लिया गया। पोत नष्ट हो गया , तो भी यात्रियों को बचा लिया गया। 
इस समय सर्दी है , इसलिए कोट पहन लो। क्योंकि इस समय सर्दी है , इसलिए कोट पहन लो। 


हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! इसमें आपको रचना के आधार पर वाक्य परिवर्तन  के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। 
अगर आपका कोई सवाल हो या कोई और जानकारी हो तो आप हमें  कमेंट बॉक्स  में कमेंट करे।


अर्थ के आधार पर वाक्य परिवर्तन | VAKYA PARIVARTAN

 अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद होते है - विधानार्थक वाक्य , निषेधात्मक वाक्य , आज्ञार्थक वाक्य , प्रश्नार्थक वाक्य , इच्छार्थक वाक्य , सन्देहार्थक वाक्य , संकेतार्थक वाक्य , विस्मयबोधक वाक्य।  इन वाक्यों को सुविधा अनुसार आपस में एक दूसरे में परिवर्तित किया जा सकता है।  इसलिए हिंदी व्याकरण में आज हम आपको इस पोस्ट में अर्थ के आधार पर वाक्य परिवर्तन  के बारे में संक्षिप्त जानकारी देंगे। 

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अर्थ के आधार पर वाक्य परिवर्तन | VAKYA PARIVARTAN

अर्थ के आधार पर वाक्य परिवर्तन 


1. विधि /विधानार्थक वाक्य से निषेध/निषेधार्थक वाक्य में वाक्य परिवर्तन :- 


विधि/विधानार्थक वाक्य   निषेध/निषेधार्थक वाक्य
मुझे संदेह हुआ कि यह पत्र तुमने लिखा।  मुझे विश्वास नहीं हुआ कि यह पत्र तुमने लिखा। 
उसने सब उपाय किये।   उसने कोई उपाय नहीं छोड़ा। 
मुग़ल बादशाहों में अकबर श्रेष्ठ था।   मुगल बादशाहों में अकबर से बढ़कर कोई नहीं था।   
नत्थू कल्लू से कुछ लम्बा है।  नत्थू कल्लू से छोटा नहीं है। 
वह घर से बाहर रहता है।  वह घर के अंदर नहीं रहता है। 
हर आदमी कभी तो गलती करता ही है।  ऐसा कोई आदमी नहीं जो कभी गलती नहीं करता।  
मेरे पास केवल चार रुपए है।  मेरे पास चार रुपए अधिक नहीं है। 
गुलाब का कोई नाम रख दो सुंगध देगा ही।   गुलाब का कोई नाम न रहे तो ऐसा नहीं है कि वह सुगंध नहीं देगा।  
आबू के मंदिर देखने लायक है।     ऐसा नहीं है  कि आबू के मंदिर देखने लायक न हो। 
यह मकान हमारे पुराने मकान से खुला है।  हमारा पुराना मकान इस मकान से खुला नहीं है। 
ये इमारते ऊंचाई में एक समान है।  ये इमारतें ऊंचाई में भिन्न नहीं है। 
मैं आपसे सहमत हूँ। 
मैं आपसे असहमत नहीं हूँ। 
जब तुम दिल्ली में थे तब कुतुबमीनार अवश्य देखा होगा। 
जब तुम दिल्ली में थे तब ऐसा नहीं हो सकता कि कुतुबमीनार देखा ही न हो। 
लड़की अपनी पुस्तक पढ़ रही थी।  लड़की किसी और की पुस्तक नहीं पढ़ रही थी।  
यह प्रस्ताव सब को स्वीकार्य है।  इस प्रस्ताव पर किसी को आपत्ति नहीं है। 
गाड़ी के समय पर आने की सम्भावना है।  गाड़ी के विलम्ब से आने की सम्भावना नहीं है।  

2. निषेध/निषेधार्थक वाक्य से विधि /विधानार्थक वाक्य में वाक्य परिवर्तन :-


निषेध/निषेधार्थक वाक्य   विधि/विधानार्थक वाक्य
मुझे कौन वोट नहीं देगा ?  मुझे सब वोट देंगे।  
तुम उससे योग्य नहीं हो।   वह तुमसे योग्य है। 
गाँधी जी का नाम किसने नहीं सुना।    गाँधी जी  सबने सुना है।    
उसकी ईमानदारी पर किसी को संदेह नहीं है।  उसकी ईमानदारी पर सबको भरोसा है। 
वह दीर्घकाल तक जीवित नहीं रहा। वह अल्पायु में ही मर गया।  
मैं सारी रात सो नहीं पाया। मैं सारी रात जागता रहा।   
उससे अच्छा खिलाडी दूसरा नहीं है।  वह सर्वश्रेष्ठ खिलाडी है। 
उपस्थित व्यक्तियों में किसी ने उसकी निन्दा नहीं की।   उपस्थित व्यक्तियों में सब ने उसकी प्रशंसा की।   
मुझे एक भी पुरस्कार नहीं मिला।     मेरे सिवाय प्रत्येक को एकआधा पुरस्कार अवश्य मिला। 
झूठ मत बोला करो। सच ही बोला करो।  
मैं किसी योजना को अधूरा नहीं छोड़ता।  मैं हर एक योजना पूरी करके छोड़ता हूँ। 
लगता था कि वह अभी मरा नहीं।  लगता था कि वह अभी जीवित है। 
प्रायः लोग गरीबों को दुःख नहीं देते।  
प्रायः लोग गरीबों को सुख ही देते है। 
आग के बिना धुआँ नहीं होता।  आग होती है तभी धुआँ होता है।  
ये दो जुड़वाँ भाई एक-दूसरे से भिन्न है।  ये दो जुड़वाँ भाई एक-समान है। 
इस बात से किसी को इंकार नहीं है।   यह बात सब को स्वीकार्य है।   


3. निश्चयवाचक वाक्य से प्रश्नवाचक वाक्य में वाक्य परिवर्तन :


निश्चयवाचक वाक्य   प्रश्नवाचक वाक्य
महाराणा प्रताप का नाम सब ने सुन रखा है।   महाराणा प्रताप का नाम किसने नहीं सुना ? 
यह एक अनुकरणीय उदाहरण है।  क्या यह अनुकरणीय उदाहरण नहीं है ?
प्यासे को मिठाई खिलाने से कोई लाभ नहीं है।   प्यासे को मिठाई खिलाने से क्या लाभ ?  
डॉक्टर वर्मा जैसे अध्यापक अब नहीं रहे।  डॉक्टर वर्मा जैसे अध्यापक अब कहाँ है ?
कन्याकुमारी के सूर्योदय और सूर्यास्त का वर्णन कोई नहीं कर सकता।  कन्याकुमारी के सूर्योदय और सूर्यास्त का वर्णन कौन कर सकता है ? 
अब तुम बिलकुल अच्छे हो गए हो।  क्या अब तुम बिलकुल अच्चे हो गए हो ?  
तुम्हारी माँ यहाँ नहीं है।   तुम्हारी माँ यहाँ कहाँ है ?
आपकी सहायता के बिना हम कुछ नहीं कर सकते थे।   आपकी सहायता के बिना हम क्या कर सकते थे ? 
मैंने सब काम कर लिया है।      मुझे क्या करना शेष है ?
अपनी अनुपस्थिति का कारण बताओ।  तुम्हारी अनुपस्थिति का क्या कारण है ?
इन नेताओ और स्वतंत्राप्राप्ति के पहले के नेताओ की कोई तुलना नहीं हो सकती।  इन नेताओ और स्वतंत्राप्राप्ति के पहले के नेताओ में क्या तुलना हो सकती है ?
तुम्हारे पड़ोस में कलह मच जाने का कारण बताओ।  तुम्हारे पड़ोस में कलह क्यों मच गयी थी ?
यदि विलम्ब हो जाए तो कोई बात नहीं।  यदि विलम्ब हो जाए तो क्या बात हो जाएगी ?
तुम्हारा काम किसी न किसी तरह हो गया।  तुम्हारा काम कैसे हो गया ?
तुम्हारी चाबी मेरे पास नहीं है।  मेरे पास तुम्हारी चाबी कहाँ है ? 
किसी आशा नहीं की जा सकती।  किससे आशा की जाए ?

4. प्रश्नवाचक वाक्य से निश्चयवाचक वाक्य में वाक्य परिवर्तन :-


प्रश्नवाचक वाक्य   निश्चयवाचक वाक्य
आप क्या बालू से तेल निकाल सकते है ?   आप बालू से तेल नहीं निकल सकते। 
हम हार गए तो क्या हो जाएगा ? हम हार गए  तो कुछ होगा नहीं। 
बात करने का क्या यही तरीका है ?  बात करने का यह तरीका नहीं है। 
आप क्या जाने पहाड़ का मज़ा ? आप पहाड़ का मज़ा नहीं जानते है। 
मोर नाचते किसने नहीं देखा है ? मोर को नाचते सबने देखा है। 
कौन ऐसा कृतघ्न होगा जो आपके उपकारों को भुला दे ? कोई ऐसा कृतघ्न नहीं हो सकता जो आपके उपकारों को भुला दे। 
ऐसा उपन्यास पढ़ने में क्यों समय नष्ट किया जाए ? ऐसा उपन्यास पढ़ने में समय नष्ट करना मूर्खता है। 
क्या इस तरह के गंदे कपड़े पहन कर स्कूल जाया जाता है ?  इस तरह के गंदे कपड़े पहन कर स्कूल नहीं जाया जाता। 
क्या हो जाएगा जो हम समय पर न पहुंचे ? हम समय पर न पहुंचे तो कुछ होने वाला नहीं है। 
क्या आग के बिना धुआँ हो सकता है ? आग के बिना धुआँ नहीं हो सकता। 
वहां कहाँ चला गया है ? उसके चले जाने का ठिकाना ज्ञात नहीं है। 
क्या तुम आज ही जाओगे ? शायद तुम आज नहीं जाओगे ?
आपकी छुट्टी का क्या हुआ ? आपकी छुट्टी का कुछ पता नहीं है। 
क्या तुम खा रहे हो ?  लगता है कि तुम कुछ नहीं खा रहे। 
परीक्षाफल कब तक मिलेगा ?देखिए परीक्षाफल कब मिलेगा। 

5. विस्मयबोधक वाक्य से विधि वाक्य में वाक्य परिवर्तन :-


विस्मयबोधक वाक्य   विधि वाक्य
काश कि मैं जवान होता !   मैं चाहता हूँ कि मैं जवान होता। 
कितना सुन्दर दृश्य ! यह बहुत ही सुंदर दृश्य है। 
सिंह भी कितना विचित्र जीव है!  सिंह बहुत विचित्र जीवों में है।  
क्या बढ़िया तरीका है तलवार भाँजने का ! तलवार भाँजने का इससे बढ़िया तरीका नहीं है। 
एकांतवास का क्या कहना !
एकांतवास का मज़ा अवर्णनीय है। 
पाप ! महापाप ! घोर पाप हो गया। 
अहा ! कैसे सुहावने बादल हैं।  सुहावने बादलों को देखकर आनंद आ रहा है।  
हैं ! तुम फेल हो गए ! 
मुझे तुम्हारे फेल होने से आश्चर्य हो रहा है। 
ये क्या उसने ऐसा कर दिया ! विश्वास नहीं होता कि उसने ऐसा कर दिया।  
इतना क्रूर ! वह अत्यंत क्रूर है। 
क्या मैं भूल कर रहा हूँ! मैं तो भूल नहीं कर रहा। 
शाबाश ! हम तुम्हे शाबाशी देते है। 
क्या करूँ , कहाँ जाऊँ! मैं लाचार और बेघर हो गया।  
बहुत अच्छे ! मुझे आपकी बात स्वीकार्य है। 
हाँ हाँ , सब ठीक !
हम आपकी बात का अनुमोदन करते है। 


हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! इसमें आपको  अर्थ के आधार पर वाक्य परिवर्तन  के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। 
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क्रिया के आधार पर वाक्य परिवर्तन | VAKYA PARIVARTAN IN HINDI

क्रिया के आधार पर वाक्य के तीन भेद होते है- कर्त्तृवाच्य ,कर्मवाच्य,भाववाच्य। प्रयोग अनुसार हिंदी व्याकरण में वाक्य को एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित कर प्रयोग किया जाता है। इसलिए हिंदी व्याकरण में आज हम आपको इस पोस्ट में  क्रिया के आधार पर वाक्य परिवर्तन  के बारे में संक्षिप्त जानकारी देंगे। 

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 क्रिया के आधार पर वाक्य परिवर्तन | VAKYA PARIVARTAN IN HINDI

क्रिया की दृष्टि से / क्रिया के आधार पर वाक्य परिवर्तन 

1. कर्त्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाना :- कर्त्तृवाच्य वाक्य में कर्त्ता की प्रधानता होती है , जबकि कर्मवाच्य में कर्म की प्रधानता होती है। अतः किसी वाक्य को कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाते समय , वाक्य में कर्त्ता को प्रधानता (मुख्य) न  गौण (छुपा हुआ)बना दिया जाता है तथा कर्म को प्रधानता दी जाती है।  कर्त्ता की गौण स्थिति भी दो तरह से हो सकती है। एक कर्त्ता को करण कारक या माध्यम के रूप में प्रयुक्त कर , उसके साथ 'से, के द्वारा' आदि विभक्तियाँ लगाकर या दूसरी स्थिति में कर्त्ता का लोप ही कर दिया जाता है।  

 जैसे -श्याम पत्र लिखेगा। यह वाक्य कर्त्तृवाच्य है इसका कर्मवाच्य रूप 'श्याम द्वारा पत्र लिखा जाएगा।' होगा।  

कर्त्तृवाच्य से कर्मवाच्य में वाक्य परिवर्तन :-

 
कर्त्तृवाच्य   कर्मवाच्य 
आज्ञा दीजिए।   आज्ञा दी जाए।  
मैंने दरवाजा खोला।   मुझसे दरवाजा खोला गया।  
इस बिल का भुगतान आज ही कर दे।   इस बिल का भुगतान आज ही कर दिया जाए।  
लड़का पेड़ पर चढ़ रहा है।  लड़के से पेड़ पर चढ़ा जा रहा है। 
नौकर को बुलाओ।  नौकर को बुलाया जाए। 
अब दुकान बंद करने का समय है।  अब समय है कि दुकान बंद की जाए। 
तुमने व्याकरण किससे पढ़ा था? तुम्हे व्याकरण किसने पढ़ाया था?
तुम्हें अपने वचन का पालन करना चाहिए।  तुमसे अपने वचन का पालन होना चाहिए।  
हमने तुम्हें यह दाँव सिखाये।  हमसे तुमने ये दाँव सीखे। 
कृपया बायें चलिए।  बायें चलने की कृपा की जाए। 
बिल्ली ने चूहे को मर डाला।   बिल्ली के हाथों चूहा मारा गया। 
कल उसने मुझे खाने पर बुलाया था।  कल मैं उसके द्वारा खाने पर बुलाया गया था।  
मक्खन यहाँ अलमारी में रखते है।  मक्खन यहाँ अलमारी में रखा जाता है। 
खिड़की टूट गई।  खिसकी तोड़ी गई।  
दरवाजा बंद कर दो।  दरवाजा बंद कर दिया जाए।  
लोग बताते हैं कि वह पागल हो गया है।   बताया जाता है कि वह पागल हो गया है। 
कलाकार मूर्ति गढ़ता है।  कलाकार द्वारा मूर्ति गढ़ी जाती है। 
वह पत्र लिखता है।  उसके द्वारा पत्र लिखा जाता है।   
राम ने पुस्तक पढ़ी।   राम द्वारा पुस्तक पढ़ी गई।   
दादी कहानी सुनाएगी।   दादी द्वारा कहानी सुनाई जाएगी। 
राम व्यायाम करता है।  राम द्वारा व्यायाम किया जाता है। 


2. कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य बनाना :- कर्त्तृवाच्य में कर्त्ता की मुख्य भूमिका होती है लेकिन कर्मवाच्य कर्म की प्रधानता होती है , अतः कर्मवाच्य से कर्त्तृवाच्य बनाते समय पुनः कर्त्ता के अनुसार क्रिया प्रयुक्त कर देंगे।  

कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य में वाक्य परिवर्तन :-
जैसे -
कर्मवाच्य    कर्त्तृवाच्य 
उसके द्वारा पत्र लिखा जाएगा।  वह पत्र लिखेगा।
बच्चो द्वारा चित्र बनाए गए।   बच्चो ने चित्र बनाए।   
गधे द्वारा बोझा ढोया गया। गधे ने बोझा ढोया।   
उसे एक तार दिया जाए। उसे एक तार दें। 
उसे सभापति चुना गया। उन्होंने उसको सभापति चुना। 
इस गली से होकर जाया जाए। इस गली से होकर जाएं। 
मकान कैसे बनाया जाता है। मकान कैसे बनाते है। 
यहाँ ऐसे खेल खेले जाते है। यहाँ ऐसे खेल खेलते है। 
हर गाँव में नलकूप लगाए जा रहे है। हर गाँव में नलकूप लग रहे है। 
ऐसा कहा जाता है कि। ऐसा कहते है कि। 
पुल की मरम्मत हो रही है। (वे) पुल की मरम्मत कर रहे है। 
तुमसे लिखा नहीं जा सकता। तुम लिख नहीं सकते। 
'अभिज्ञान शाकुंतलम' कालिदास द्वारा लिखा गया। 'अभिज्ञान शाकुंतलम' कालिदास ने लिखा। 
उसको पढ़ाया-लिखाया जा रहा है। वह पढ़-लिख रहा है। 
कश्मीर की सुषमा का वर्णन नहीं किया जा सकता। कश्मीर की सुषमा का वर्णन कोई नहीं कर सकता। 
घायल खिलाड़ी अस्पताल लाया जा रहा था। (वे) घायल खिलाड़ी को अस्पताल ले जा रहे थे। 
उसे सब कुछ बता दिया जाए। उसे सब कुछ बता दें। 
हमें रिहा कर दिया गया। (उन्होंने) हम रिहा कर दिया। 
रद्दी कागज़ फेंक दिए गए। 
(उन्होंने) रद्दी कागज़ फेंक दिये।  


3. कर्त्तृवाच्य से भाववाच्य बनाना :- कर्तृवाच्य में प्रयुक्त क्रिया कर्त्ता के अनुसार प्रयुक्त होती है , जबकि भाववाच्य में प्रयुक्त क्रिया न कर्त्ता के अनुकूल होती है , और न ही कर्म के अनुसार बल्कि वह असमर्थता के भाव के अनुसार प्रयुक्त होती है। अतः कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाते समय कर्त्ता के साथ ' से ' लगाना चाहिए या कर्त्ता का उल्लेख ही नहीं हो , लेकिन कर्त्ता के उल्लेख न होने की स्थिति तब होती है , जब मूल कर्त्ता सामान्य हो।  साथ ही मुख्य क्रिया के साथ संयोगी क्रिया 'जा' लगती है।

कर्तृवाच्य से भाववाच्य में वाक्य परिवर्तन :- 
जैसे -
क्रम 
स.
कर्त्तृवाच्य  भाववाच्य 
1.मैं अब चल नहीं पाता।  मुझ से अब चला नहीं जाता।  
2. गर्मियों में लोग खूब नहाते है।  गर्मियों में खूब नहाया जाता है। 
3. वे गा नहीं सकते।  उनसे गाया नहीं जा सकता।


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अंटार्कटिका महाद्वीप के बारे मे जानकारी | antarctica mahadeep

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अंटार्कटिका महाद्वीप के बारे मे जानकारी | antarctica mahadeep 


अंटार्कटिका महाद्वीप के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य 

  • अंटार्कटिका महाद्वीप क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का पाँचवाँ बड़ा महाद्वीप है। 
  • यह दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित है। 
  • यह वैज्ञानिको को पृथ्वी के बारे में अधिक से अधिक जानकारी देने के अनोखे अवसर प्रदान करता है।  इसलिए इसे विज्ञानं के लिए समर्पित -महाद्वीप कहते है। 
  • दक्षिणी ध्रुव इस महाद्वीप के लगभग केंद्र में स्थित है। 
  • इसका सम्पूर्ण क्षेत्रफल 14,000,000 वर्ग किमी (5,400,000 वर्ग मील) है। यह एशिया , अफ्रीका , उत्तरी अमेरिका , दक्षिणी अमेरिका के बाद बड़ा महाद्वीप है। 
  • यह एक जनशून्य महाद्वीप है। परन्तु शोध कार्य करने वाले वैज्ञानिको के कारण औसत वार्षिक जनसंख्या 5000 रहती है। 
  • अंटार्कटिका के सबसे नजदीक आवासीय महाद्वीप " दक्षिणी अमेरिका " है। 
  • यह सदैव बर्फ से ढँका रहता है। इसलिए इसे श्वेत महाद्वीप कहते है। इसका अन्य उपनाम- विज्ञानं का महाद्वीप भी है। 
  • अंटार्कटिका की खोज- कैप्टन कुक ने सन 1773 में की थी। परन्तु ये अंटार्कटिका महाद्वीप की मुख्य भूमि तक नहीं पहुंचे थे। 
  • अंटार्कटिका की मुख्य भूमि की खोज करने वाला व्यक्ति '' वेलिंग शॉसेन '' को माना जाता है , जिन्होंने 1820 ई. में वोस्टॉक नामक जहाज पर सवार होकर यहाँ पहुँचा था।  ये रुसी शाही नौसेना का एक कप्तान थे। 
  • अंटार्कटिका महाद्वीप की धरती पर पहला कदम " डेविस" ने रखा था। 
  • यहाँ पहुंचने वाली पहली महिला "कैरोलिन मिकेल्सन" थी। 
  • क़्वीनमॉड -पर्वतमाला अंटार्कटिका महाद्वीप को दो भागों में बाँटती है। 
  • यहाँ विश्व का दूसरा तथा अंटार्कटिका का पहला ठंडा स्थान "वोस्टॉक" स्थित है। 
NOTE:- विश्व का पहला ठंडा स्थान - एशिया महाद्वीप के रूस देश के साइबेरिया प्रदेश में " बर्खोयांस्क" है। 

  • अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाला पहला व्यक्ति - नॉर्वे का "एमंडसन" है।  जो 1911 ई. में पहुंचा।
  • यहाँ की सर्वोच्च पर्वत शिखर "विन्सन मासिफ" है। जिसकी ऊंचाई 4892 मीटर है। 
  • अंटार्कटिका में जलीय भाग " रॉस सागर " स्थित है। 
  • अंटार्कटिका पर पहुँचने वाला पहला भारतीय "रामचरण जी" है। जो रूस की सहायता से पहुंचे थे। 
  • स्वतन्त्र भारतीय अभियान दल की ओर से जाने वाले पहले भारतीय "कैप्टन सैय्यद जहूर अब्बासी" है। 
  • दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला भारतीय " डॉ गिरिराज सिरोही" थे। 
  • अंटार्कटिका के पामर प्रायद्वीप पर ग्रीष्मकाल में बर्फ नहीं जमती है। 
  • पामर प्रायद्वीप में पेंग्विन पक्षी मिलता है। 
  • इस महाद्वीप की सबसे लम्बी पर्वमाला " ट्रांस अंटार्कटिका " है। 
  • यहाँ विश्व का सबसे लम्बा ग्लेशियर " लैम्बर्ट" स्थित है।  जिसकी लम्बाई 80 KM है। 
  • अंटार्कटिका महाद्वीप पर भारत के तीन प्रमुख अनुसन्धान केंद्र दक्षिण गंगोत्री , मैत्री तथा भारती स्थित है। 
  • दक्षिण गंगोत्री पर शोध का कार्य 1984 ई. में प्रारम्भ हुआ।  परन्तु वर्तमान में ये बंद है। 
  • मैत्री पर शोध कार्य 1989 ई. में प्रारम्भ हुआ। परन्तु वर्मन में ये भी बंद है। इसका नाम इंदिरा गाँधी ने रखा था। 
  • भारती अनुसंधान केंद्र पर शोध कार्य 2012 में प्रारंभ हुआ। जो की "लार्समन हिल्स" पर स्थित है।
  •  अंटार्कटिका का सबसे ऊँचा सक्रीय ज्वालामुखी " माउंट सिडल " है। जिसकी ऊँचाई 4285 मीटर है। 
  • यहाँ का दूसरा सबसे ऊँचा सक्रिय ज्वालामुखी " माउंट एर्बुश / माउंट इरेबस " है। जिसकी ऊँचाई 3794 मी है। 
  • अंटार्कटिका पर विश्व का सबसे बड़ा अनुसन्धान केंद्र "मेकमार्डे" है। जो USA  द्वारा स्थापित किया गया है। यहाँ एक साथ 1000 वैज्ञानिक काम कर सकते है। 
  • सभी भारतीय अभियान दल अंटार्कटिका पर गोआ से जाते है। गोआ में भारत का अंतर्राष्ट्रीय अंटार्कटिका केंद्र स्थित है। 
  • भारत के सभी अनुसन्धान केंद्रों की निगरानी 'नॉर्वे' देश से की जाती है। 
  • सबसे पहले ओजोन छिद्र अंटार्कटिका पर 1985 ई. में देखा गया था। जो 'फरहान-एट-अल' नामक स्थान पर देखा गया था। 
  • इस महाद्वीप का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम रहता है। यहाँ शीत ऋतु में विश्व का सबसे न्यूनतम तापमान -95 डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है। 
  • शीत ऋतु तथा ग्रीष्म ऋतु में महाद्वीप का अलग-अलग आकार होने पर ही इसे "गतिशील महाद्वीप" कहते है।
  • यहाँ की मुख्य वनस्पति  लाइकेन और मॉस है। 
  • अंटार्कटिका महाद्वीप में "पोल ऑफ़ कोल्ड" में विश्व का न्यूनतम वार्षिक तापमान मिलता है। 
  • यहाँ का गहनतम बिंदु 'बेंटल ट्रेन्च' (2853 M) है। 
  • अंटार्कटिका महाद्वीप की सबसे लम्बी नदी " ओनेक्स " (32 KM) है। 


वाक्य : परिभाषा, अंग और भेद | vakya vichar in hindi

 वाक्य क्या है ? वाक्य को कैसे परिभाषित करे। ये सवाल हर किसी के मन में आता है। इसलिए हिंदी व्याकरण में आज हम आपको इस पोस्ट में  वाक्य की  परिभाषा, वाक्य के अंग,  वाक्य  के भेद( जिसमें क्रिया की दृष्टि से वाक्य के प्रकार , अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद , रचना के आधार पर वाक्य के प्रकार ) ,  वाक्य  के उदाहरण, हिंदी में वाक्य का प्रयोग आदि के बारे में संक्षिप्त जानकारी देंगे। 

  

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वाक्य क्या है ?

वाक्य की परिभाषा:- भाषा की सबसे छोटी वर्ण है। वर्णो के सार्थक समूह को शब्द कहते है तथा शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते है।  अर्थात वाक्य शब्द-समूह का वह सार्थक विन्यास होता है , जिससे उसके अर्थ एवं भाव की पूर्ण एवं सुस्पष्ट अभिव्यक्ति होती है। अतः वाक्य में आकांक्षा , योग्यता, आसक्ति एवं क्रम का होना आवश्यक है।  

वाक्य के अंग  

सामान्य वाक्य के दो अंग माने गए है- 

  1. उद्देश्य 
  2. विधेय 
1. उद्देश्य :- जिसके बारे में वाक्य में कहा जाता है , उसे उद्देश्य कहते है। अतः कर्त्ता ही वाक्य में 'उद्देश्य' का कार्य करता है , किन्तु यदि कर्त्ता कारक के साथ उसका कोई विशेषण प्रयुक्त हो , तो उसे कर्त्ता का विस्तारक कहते है, और वह भी उद्देश्य के ही अंतर्गत आता है। जैसे- 
  • मेरा भाई नरेंद्र धार्मिक पुस्तकें अधिक पढता है। 
इस वाक्य में 'मेरा भाई नरेंद्र' उद्देश्य है, जिसमें 'नरेंद्र' कर्त्ता है तो 'मेरा भाई' नरेंद्र कर्त्ता का विशेषण अर्थात इसे कर्त्ता का विस्तारक कहेंगे। 

2. विधेय :- उद्देश्य अर्थात कर्त्ता के बारे में वाक्य में जो कुछ भी कहा जाता है , उसे 'विधेय' कहते है। अतः विधेय के अंतर्गत वाक्य में प्रयुक्त कर्म , कर्म का विस्तारक , क्रिया , क्रिया का विस्तारक , पूरक तथा पूरक का विस्तारक, आदि आते है। जैसे-  
  • श्याम धार्मिक पुस्तकें अधिक पढ़ता है। 
इस वाक्य के अंतर्गत आने वाक्यांश 'धार्मिक पुस्तके अधिक पढता है' वाक्य का विधेय है, जिसमें 'पढता है' क्रिया है, तो 'अधिक' शब्द क्रिया का विस्तारक है(जो क्रिया की विशेषता को बतलाता है, क्रिया का विस्तारक कहलाता है।) , 'पुस्तके' शब्द वाक्य में कर्म है तो 'धार्मिक' शब्द पुस्तकों की विशेषता बतलाने के कारण धार्मिक 'कर्म का विस्तारक' है। इनके अतिरिक्त जब वाक्य में क्रिया अपूर्ण होती है या यदि अन्य कोई शब्द प्रयुक्त होता है या  तो उसे 'पूरक' कहते है तथा 'पूरक' की विशेषता बतलाने वाले शब्द को ही 'पूरक का विस्तारक' कहते है। 


वाक्य के भेद :-

क्रिया , अर्थ तथा रचना के आधार पर वाक्यों के निम्नलिखित भेद प्रभेद में बाँटा जाता है -

क्रिया के आधार पर भेद :- क्रिया की दृष्टि से वाक्य के तीन भेद होते है। 

  1. कर्त्तृवाच्य प्रधान 
  2. कर्मवाच्य प्रधान 
  3. भाव वाच्य प्रधान 
1. कर्त्तृवाच्य प्रधान :- जब वाक्य में प्रयुक्त होने वाली क्रिया का प्रधान व सीधा सम्बन्ध कर्त्ता से होता है अर्थात क्रिया के लिंग , वचन दोनों कर्त्ता कारक के अनुसार प्रयुक्त होते है , उसे कर्त्तृवाच्य प्रधान वाक्य कहते है।  जैसे -
  • रविंद्र पुस्तक पढ़ता है।  
  • आरती पुस्तक पढ़ती है।  

2. कर्मवाच्य प्रधान :- जब वाक्य में प्रयुक्त होने वाली क्रिया का प्रधान व सीधा सम्बन्ध कर्म से होता है अर्थात क्रिया के लिंग , वचन दोनों कर्त्ता कारक के अनुसार न होकर कर्म कारक के अनुसार प्रयुक्त होते है , उसे कर्मवाच्य प्रधान वाक्य कहते है।  जैसे -
  • महेंद्र ने गाना गाया। 
  • वर्षा ने गाना गाया। 

3. भाव वाच्य प्रधान :- जब वाक्य में प्रयुक्त होने वाली क्रिया न तो कर्त्ता के अनुसार , न ही कर्म के अनुसार प्रयुक्त होती है बल्कि भाव के अनुसार प्रयुक्त होती है, तो उसे भाव वाच्य प्रधान वाक्य कहते है।  जैसे -
  • हेमराज से पढ़ा नहीं जाता।  
  • जया से पढ़ा नहीं जाता।  

अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद :- अर्थ के आधार पर वाक्य को 8 भेद बाँटा जाता है। 

  1. विधानार्थक वाक्य 
  2. निषेधात्मक वाक्य 
  3. आज्ञार्थक वाक्य 
  4. प्रश्नार्थक वाक्य 
  5. इच्छार्थक वाक्य 
  6. सन्देहार्थक वाक्य 
  7. संकेतार्थक वाक्य 
  8. विस्मय बोधक वाक्य 

1. विधानार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में किसी कार्य या बात का होना पाया जाता है , उसे विधानार्थक वाक्य कहते है।  जैसे - 
  • भूपेंद्र खेलता है।  
2. निषेधात्मक वाक्य :- जिस वाक्य में किसी विषय के अभाव का या किसी बात के न होने बोध हो, उसे निषेधार्थक वाक्य कहते है। जैसे - 
  • नीता घर पर नहीं है। 
3. आज्ञार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में किसी दूसरे के द्वारा उपदेश, आदेश या आज्ञा देने का बोध हो , उसे आज्ञार्थक वाक्य कहते है। जैसे - 
  • निशा , तुम गाना गाओ। 
4. प्रश्नार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में किसी कार्य या विषय सम्बन्ध में प्रश्न पूछने का बोध हो ,अर्थात प्रश्नात्मक भाव प्रकट हो , उसे प्रश्नार्थक वाक्य कहते है।  जैसे-
  • कौन गाना गा रही है?
  • तुम कहाँ जा रहे हो ?
5. इच्छार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में आशीर्वाद या इच्छा के भाव का बोध हो, उसे इच्छार्थक वाक्य कहते है। जैसे -
  • ईश्वर करे , तुम्हारा भला हो। 
6. सन्देहार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में संदेह या सम्भावना का बोध हो उसे सन्देहार्थक वाक्य कहते है। जैसे -
  • उन दोनों में जाने , कौन खेलेगा। 
7. संकेतार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में शर्त या संकेत का बोध हो , उसे संकेतार्थक  वाक्य कहते है। जैसे-
  • यदि तुम पैसे दो तो मैं चलूँ। 
  • दूसरों का खुश करोगे तो तुम भी खुश रहोगे। 
8. विस्मय बोधक वाक्य :- जिस वाक्य से आश्चर्य,विस्मय आदि का भाव प्रकट हो , उसे विस्मयादिबोधक वाक्य कहते है। जैसे - 
  • वाह ! कैसा नयनाभिराम दृश्य है। 

रचना के आधार पर वाक्य के भेद :- रचना के आधार पर वाक्य को तीन भेद में बाँटा गया है। 

  1. साधारण वाक्य 
  2. मिश्र या मिश्रित वाक्य 
  3. संयुक्त वाक्य 
1. साधारण वाक्य :- जिस वाक्य एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय होते है , उसे साधारण वाक्य कहते है। जैसे - 
  • नीता खाना बना रही है। 
2. मिश्र या मिश्रित वाक्य :- जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य तथा एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य होते है,  उसे मिश्र या मिश्रित वाक्य कहते है। जैसे-
  • गाँधी जी ने कहा कि सदा सत्य बोलो। 
NOTE :-इस वाक्य में आश्रित तथा प्रधान उपवाक्य का निर्णय करने से पूर्व आश्रित एवं प्रधान उपवाक्यों के विषय में जान लेना अतिआवश्यक है। 

(अ) प्रधान उपवाक्य :- जो उपवाक्य मुख्य या प्रधान उद्देश्य और मुख्य विधेय से बना हो उसे 'प्रधान उपवाक्य' कहते है। ऊपर दिए हुए वाक्य में 'गाँधी जी ने कहा' प्रधान उपवाक्य है जिसमें 'गाँधी जी' प्रधान या मुख्य उद्देश्य है तो 'कहा' मुख्य विधेय। 

(आ) आश्रित उपवाक्य - जो उपवाक्य प्रधान उपवाक्य पर ही आश्रित रहता है , उसे आश्रित उपवाक्य कहते है। ऊपर दिए हुए वाक्य में 'कि सदा सत्य बोलो।' आश्रित उपवाक्य है। 
आश्रित उपवाक्य तीन प्रकार के होते है। 
(i) संज्ञा आश्रित उपवाक्य :- जब किसी आश्रित उपवाक्य का प्रयोग प्रधान उपवाक्य की किसी संज्ञा की जगह पर होता है तो उसे संज्ञा आश्रित उपवाक्य कहते है। 'संज्ञा आश्रित उपवाक्य' की शुरुआत प्रायः 'कि' शब्द से होती है। ऊपर दिए वाक्य में 'कि सदा सत्य बोलो' में 'कि' से प्रारम्भ होने के कारण संज्ञा आश्रित उपवाक्य कहलायेगा। 
(ii) विशेषण आश्रित उपवाक्य :- कोई आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य के किसी संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बताये तो उस उपवाक्य को 'विशेषण आश्रित उपवाक्य' कहते है। विशेषण उपवाक्य की शुरुआत प्रायः जिसकी , जो ,जिसका , जिसके आदि में से किसी शब्द से होता है।  जैसे -
  • जो विद्वान् होते है , उनका सभी आदर और समान करते है। 
(iii) क्रिया विशेषण आश्रित उपवाक्य :- जब कोई आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की क्रिया की विशेषता बताये या सूचना दे , तो उस आश्रित उपवाक्य को 'क्रिया विशेषण आश्रित उपवाक्य'  कहते है।  क्रिया विशेषण उपवाक्य प्रायः यदि , जहाँ , जैसे , यघपि , क्योंकि , जब , तब आदि में से किसी एक शब्द से शुरू होता है।  जैसे -
  • यदि हेमंत परिश्रम करता , तो अवश्य उत्तीर्ण होता। 
3. संयुक्त वाक्य :- जिस वाक्य दो या दो से अधिक प्रधान उपवाक्य या समानाधिकरण उपवाक्य या साधारण वाक्य हो तथा वे किसी संयोजक शब्द ( अथवा , और , परन्तु , लेकिन , किन्तु , तथा , एवं , या , बल्कि , अतः आदि ) से जुड़े हो , उसे संयुक्त वाक्य कहते है। जैसे -
  • सुरेश आया किन्तु भूपेंद्र चला गया। 
NOTE :- समानाधिकरण उपवाक्य :- ऐसे उपवाक्य जो प्रधान या आश्रित उपवाक्य के समान अधिकार वाला हो उसे समानाधिकरण उपवाक्य कहते है। 


हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! इसमें आपको  वाक्य की  परिभाषा, वाक्य के अंग,  वाक्य  के भेद( जिसमें क्रिया की दृष्टि से वाक्य के प्रकार , अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद , रचना के आधार पर वाक्य के प्रकार ) ,  वाक्य  के उदाहरण, हिंदी में वाक्य का प्रयोग आदि  के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। 

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