what is geography भूगोल क्या है?

भूगोल क्या है? भूगोल शब्द लेटिन /ग्रीक भाषा के दो शब्दों Gaia /गैया तथा Graphien अर्थात पृथ्वी का वर्णन करना  मिलकर बना है।  आज के इस Article में हम भूगोल का परिचय,भूगोल की परिभाषा,what is geography, what do you mean by geography, what is geography in hindi आदि के बारे में संक्षिप्त जानकारी देंगे।

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भूगोल का अर्थ :- 
  • भूगोल शब्द लेटिन/ग्रीक भाषा के दो शब्दों Gaia /गैया तथा Graphien अर्थात पृथ्वी का वर्णन करना  मिलकर बना है।ग्रीक भाषा से यह आंग्ल भाषा में Geo+graphy बना।  हिंदी भाषा में "गोलाकार पृथ्वीतल का वर्णन करना भूगोल है। जिसके व्यापक अर्थनिहित है। "
  • geography (भूगोल) शब्द की उत्पति के सर्वप्रथम लिखित प्रमाण मिश्र की "एलेक्जेंड्रिया वेधशाला में 2300 ई. पू. में " Geography लिखने के साथ मिला है तथा इराटास्थनीज ने Geography शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया।  
  • भूगोल मानव + प्रकृति के जटिल अन्तः सम्बन्धो के रहस्योद्घाटन पर केंद्रित विज्ञानं है। इसी कारण से यह सक्रीय , प्रगतिशील ,सजीव और प्राचीनतम क्रमबद्ध विज्ञानं है।  मानव तथा प्रकृति के जटिल अन्तः सम्बन्धो के कारण निरंतर गतिशील विज्ञानं है। मानव तथा प्रकृति के सभी तथ्यों के अध्ययन के कारण यह अन्तः अनुशासन विज्ञानं है।  
  • मानव के उद्गम तथा सभ्यता के विकास से भूगोल की विषयवस्तु के जुड़े रहने के कारण इसे "ज्ञान की प्राचीनतम शाखा " और "ज्ञान की जननी " कहते है।
  • डेबन  नामक विद्वान् ने भूगोल को मानव सभ्यता का सहगामी बताते हुये स्पष्ट किया की " मानव की मुलभुत प्रवृति में ही भूगोल की जड़े छिपी हुयी है। " क्योकि मानव की अपने परिवेश को ही अधिक जानने की प्रकृति या जिज्ञासा को शांत करने के लिए प्रवृत रहता है।  
परिभाषाये :-
  • 150 AD  में भूगोल -दार्शनिक टालेमी ने "Geographika Syntaxis " (जियोग्राफिका सिंटेक्सिस )में भूगोल को परिभाषित करते हुए स्पष्ट किया की "भूगोल एक ऐसा उन्नयन विज्ञानं है जो पृथ्वी की आभा को आकाश में देखता है" . 
  • स्ट्राबो भौगोलिक दार्शनिक ने Geographia नामक पुस्तक में स्पष्ट किया की "Geography is , in truth, an encyclopaeldia of information concerting the various contries of the inhabited world as known at the beginning of the christian era, it is a historical geography and it is a philosophy of geography; अर्थात भूगोल विभिन्न लक्षणों वाली पृथ्वी की विशेषताओं तथा थल व जल पर रहने वाले जीवो के बारे में परिचित करता है। इस प्रकार तथ्यात्मक ज्ञान की सीमितता तथा जांच उपकरणों के आभाव में इस काल में भूगोल के बारे में यह क्रांति बन गयी की भूगोल मात्र स्थानों के वर्णन का विज्ञानं है।  
  • अरब भूगोलवेत्ताओं में हकुल , अल -मसूदी , अल-बरुनी, इब्न -बतूता ,इब्न - खाल्दून आदि ने भूगोल को विभिन्न स्थानों तथा भौतिक भूदृश्य का विवरण देने वाला विज्ञानं बताया।  इनमे अलमसूदी ने स्पष्ट किया की  "भूगोल का मानवीय क्षेत्र , मानव व पर्यावरण के सह - सम्बन्ध को व्यक्त करता है और मानव के पृथ्वी पर परिवर्तित प्रभावों को जल , प्राकृतिक वनस्पति और धरातल कारक प्रभवित करते है। "
  • 17 वी सदी में भूगोल का वास्तविक विकास हुआ।  वेरेनियस ने भूगोल को मिश्रित गणित मानते हुये स्पष्ट किया की " भूगोल पृथ्वी की सतह को अध्ययन का केंद्र मानकर इसे समझाने वाली विधा है जिसके अंतर्गत जलवायु , धरातलीय लक्षण , जल वन , मरुस्थल , खनिज , पशु भू-तलीय सवरूप तथा पृथ्वी पर बसे मानव का निरीक्षण तथा वर्णन होता है। " वेरेनियस तत्कालीन समय का प्रथम भूगोलवेता था जिसने भूगोल के अध्ययन में समग्रता का संचार किया था। इसलिए उसका वैज्ञानिक भूगोल के विकास में अद्वितीय है।  
  • ;काण्ट ने माना की " भूगोल क्षेत्रीय अध्ययन है और उसका कोर( मूल ) क्षेत्रीय इकाइयां है। " काण्ट का योगदान भूगोल को बौद्धिक प्रतिष्ठा प्राप्त कराना और उसे समग्रता प्रदान करना है।  
  • (Kosmas ,Aspect of Nature ,1845) तथा हम्बोल्ट (Alexander von Humooldt) के अनुसार "भूगोल पृथ्वी की सतह का समग्र  स्थापित विज्ञानं है जो पृथ्वी और उसके खण्डों की क्षेत्रीय समग्रता की व्याख्या करता है जिसमे मानव सहित पृथ्वी के सभी भौतिक तथा अभौतिक तत्व अध्ययन में सम्मिलित है। " हम्बोल्ट ने "तार्किक कार्यकारण के सिद्धांत" को विकसित कर प्राकृतिक क्रियाओ का मानव पर प्रभावों के अन्तः सम्बन्ध को समझाया है।  
  • कार्ल रिटर ने 1817 में अडकुंडे में भूगोल की परिभाषा को निम्न प्रकार से व्यक्त किया की "भूगोल प्रकृति के समायोजित तत्वों से बानी समग्र इकाई का अध्ययन है।  भूमण्डल के समस्त लक्षण , घटनाओ आदि जिसमे पृथ्वी के भिन्न - भिन्न भागो तथा उनके संघटको (तत्व ) में आधारभूत समरसता पायी जाती है। "
  • हैटनर के अनुसार " भूगोल का अध्ययन विभिन्न क्षेत्रीय स्तरों पर विभिन्न तत्वों के सहअस्तित्व तथा परस्पर से उत्पन्न विशिष्टता पर केंद्रित है। "
  • आटो श्लूटर ने " भूगोल को भूदृश्यो का अध्ययन बताया और प्रत्येक क्षेत्र में इन्द्रियानुभूत भूदृश्यो की समग्रता का अध्ययन केंद्रित है।  श्लूटर ने भूदृश्यो को "सांस्कृतिक दृश्य तथा प्राकृतिक लैण्डशाफ़्ट में विभक्त किया।  
  • पाल विडाल -दि -ला ब्लांश फ़्रांस में आधुनिक भूगोल चिंतन के विकास में ब्लांश ने "मानव केंद्रित"नयी विचारधारा का प्रतिपादन किया।  ब्लांश के अनुसार "Geography is the science of places but of men, it is interested in the events of history in so far as these bring to work and to light in the countries where they take place, qualities and potentialities which without them world remain latent" भूगोल की रूचि देशो में घटित ऐतिहासिक घटनाओ में है क्योकि वे स्थानों/देशो का निरूपण करती है, उन्हें प्रकाश में लती है।  उन स्थानों के गुणों तथा क्षमताओं यहाँ घटित क्रियाओ के अभाव में अप्रकट बनी हुई थी।  
  • मैकन्डर के अनुसार " पृथ्वी पर सब कुछ अनिवार्य रूप से एक निश्चित स्थान पर घटित होता है।  समय तथा घटना में भूगोल की कोई दीवार खड़ी नहीं होती है।  दोनों परिपूरक अनुदृष्टियाँ है।  घटनाये अन्तः निहित कार्य कारण मानव -प्राकृतिक परिवेश की पारस्परिकता में निहित होते है और उनके विश्लेषण को विश्व स्तर आंकलित करना आवश्यक है। "
  • रिचर्ड हार्टशोन को भूगोल का निवारक कहा जाता है।  हार्टशॉन ने 1939 तथा 1959 में भूगोल को इस प्रकार से परिभाषित किया "भूगोल पृथ्वी तल की विविधता तथा परिवर्तनशील लक्षणयुक्त सतह का शुद्ध ,क्रमबद्ध तथा तर्कपूर्ण विवरण तथा व्याख्या करता है। हार्टशॉन की देन के कारण से " भूगोल क्रमबद्ध बना और उसमे सिद्धांत विरूपण " की क्षमता का विकास हुआ।  उसमे " स्थान " के बदले "क्षेत्र विश्लेषण " , "वास्तविक" के बदले "सापेक्षिक" और "स्थानिक समष्टि" के बदले "अन्तः क्षेत्रीय" और "गति" जैसी प्रवृत्तियों भूगोल में विकसित हो पायी।  इस प्रकार हार्टशॉन का योगदान इसी "क्रमबद्ध विश्लेषण एवं सापेक्षिक अन्तःक्षेत्रीयता" को समझने बुझने पर भूगोल में स्थान दिलवाने में अग्रणीय रहा है।  
  • एंकरमैन ने Geography as fundamental Discipline नामक लेख में स्पष्ट किया की " भूगोल की प्रधान विषय-वस्तु पृथ्वी की साथ पर उपलब्ध विभिन्न भूदृश्यो के मध्य पारस्परिक परिवर्तनशील सह-सम्बन्धो का विश्लेषण ही है। "
  • 19वी सदी के अंत तक भूगोल में "मानव प्रधान"तथा "प्रकृति प्रधान" चिंतन में दूरिया बढ़ती गयी और भूगोल में समग्रता के सिद्धांत पर प्रश्न -चिन्ह उत्पन्न हो गए। इस समग्रता की पूणः स्थापनाका श्रेय रेटजेल तथा रिचतो फन को जाता है।  
  • रेटजेल मानता था जो की भौतिक तत्वों की भांति मानव क्रियाओ तथा सामाजिक संघटन से उत्पन्न भूदृश्यो का क्रमबद्ध आंकलन तथा विश्लेषण संभव है और प्राकृतिक वातावरण मानव जीवन के विभिन्न पक्षों , संस्कृति और सामाजिक संघटन में निर्धारक भूमिका निभाता है।  अतः रेटजेल की मूल विचारधारा मानव के क्रिया कलापो , सामाजिक व्यवस्थाजन्य भूदृश्यो तथा भौतिक वातावरण के अन्तःसम्बन्धो पर निर्भर थी। इस प्रकार रेटजेल ऐसे प्रथम भौगोलिक विद्वान् थे जिन्होंने " सांस्कृतिक भूदृश्य " की संकल्पना को वैचारिक आधार पर प्रदान किया।  
  • फर्डीनांड वो रिचथोफन के अनुसार भूगोल पृथ्वी की सतह के भिन्न जैविक तथा अजैविक तत्वों का विश्लेषण और सह अस्तित्व के कारको के मध्य कार्य कारण सम्बन्धो तथा उनके सामान्य नियमो का प्रतिपादन करता है।  


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