rajasthan me rail marg - rail parivahan राजस्थान में रेल परिवहन

rajasthan me rail marg - rail parivahan राजस्थान में रेल परिवहन भारत में रेलमार्गो का निर्माण 1850 ई. में तत्कालीन वॉयसराय लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में आरम्भ हुआ।  आज हम आपको राजस्थान के रेल मार्गो , राजस्थान में रेल परिवहन , राजस्थान में रेल सर्विसेज , सबसे बड़ा रेल मार्ग , राजस्थान में रेलवे जोन , राजस्थान में रेल मंडल , उत्तर -पश्चिमी रेलवे , राजस्थान में मेट्रो प्रोजेक्ट , राजस्थान में रेलवे के उपक्रम , राजस्थान में रेलवे के कारखाने आदि के बारे में संक्षिप्त जानकारी देंगे।

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rajasthan me rail marg - rail parivahan राजस्थान में रेल परिवहन

Rajasthan me Rail marg - Rail parivahan राजस्थान में रेल परिवहन


  • देश में माल ढोने एवं यात्री परिवहन का मुख्य साधन रेलें है। 
  • भारत में रेलमार्गो का निर्माण 1850 ई. में तत्कालीन वॉयसराय लार्ड डलहौजी के कार्यकाल में आरम्भ हुआ।  
  • इंग्लैंड की ईस्ट इण्डियन रेलवे कम्पनी तथा ग्रेट इंडियन पेनिनस्यूलर रेलवे कंपनी ने भारत रेल लाइन बिछाने का कार्य प्रारम्भ किया।  
  • विश्व में पहली रेल सेवा की शुरुआत 1829 में इंग्लैंड में हुई थी।  
  • भारत में रेल सेवा का प्रारम्भ 16 अप्रैल , 1853 को हुआ , जब देश की पहली रेलगाड़ी बोरीबन्दर (मुंबई) से थाने के बीच 33.81 किमी फासले पर चलाई गई।  
  • यह रेल ग्रेट इंडियन पेनिनस्यूलर रेलवे कम्पनी ने स्थापित की थी।  उसके बाद 15 अगस्त , 1854 को हावड़ा से हुगली के बीच रेल सेवा की शुरुआत हुई।  
  • भारतीय रेल प्रणाली एशिया की सबसे बड़ी एवं एकल प्रबंध व्यवस्था में विश्व में दूसरे स्थान पर है।  
  • भारतीय रेल व्यवस्था पूर्व में 9 क्षेत्रीय रेल-जोनो में विभाजित थी।  1 अक्टुम्बर , 2002 में देश में निम्न नये रेल जोनो ने कार्य आरम्भ किया।  
  • (i) पूर्वी मध्य रेलवे :- मुख्यालय -हाजीपुर।  इसका गठन पूर्वी एवं पूर्वोत्तर रेलवे जोन में से किया गया है।  
  • (ii) उत्तर- पश्चिमी रेलवे : मुख्यालय - जयपुर।  इसका गठन उत्तरी एवं पश्चिमी रेलवे के कुछ क्षेत्रो को लेकर किया गया है।  
  • इसके पश्चात 4 जुलाई , 2002 की अधिसूचना के तहत 5 नये रेलवे जोन 1 अप्रैल, 2003 से गठित किये गए।  
  • इस प्रकार 1  अप्रैल , 2003 को देश में 16 रेलवे जोन हो गए है।  साथ ही केंद्र सरकार द्वारा 8 नये रेल मंडलो का भी गठन किया गया है जिनको मिलाकर देश में कुल 67 रेल मंडल हो गये है।  
  • राज्य में वर्तमान में एक जोन एवं पाँच मंडल कार्यालय है।  
  • राजस्थान में 14 जून , 2002 को बनाये गये नए जोन उत्तर-पश्चिमी रेलवे में राजस्थान के चार रेल मंडल शामिल किये गये है (1) जयपुर , (2) अजमेर , (3) बीकानेर , (4) जोधपुर।  
  • राज्य का कोटा मंडल पश्चिमी - मध्य जोन में है जिसका मुख्यालय जबलपुर है।  
  • राजस्थान में प्रथम रेल की शुरुआत जयपुर रियासत में आगरा फोर्ट से बाँदीकुई के बीच अप्रैल ,1874  में हुई।  
  • 11 अगस्त , 1879 को अजमेर में लोको कारखाना स्थापित किया गया जिसमें 1895 में पहला इंजन बनकर तैयार हुआ।  
  • 1992 में भारतीय रेलवे द्वारा प्रारंभ की गई यूनीगेज योजना के तहत राज्य में मीटरगेज रेलमार्गो को तीव्रता से ब्रांडगेज रेलमार्गो में परिवर्तित किया जा रहा है।  
  • राजस्थान में रेलमार्गो की कुल लम्बाई मार्च , 2012 के अंत तक 5822.28 किमी थी जो देश के रेलमार्गो की कुल लम्बाई का 9.23% है।  
  • राज्य में प्रति हजार वर्ग किमी में रेलमार्गो की औसत लम्बाई 16.90 किमी थी जबकि यह राष्ट्रीय स्तर पर 19.23 किमी थी।  
  • राज्य में कुल रेलमार्गो की लम्बाई  4756.32 किमी (79.57%) ब्रांडगेज , 979.20 किमी (18.93%)  मीटरगेज एवं 86.76 किमी (1.50%) नैरोगेज थी।  
राज्य में तीन नई रेलवे लाइनों का निर्माण पूर्ण :-
  1. अजमेर - पुष्कर के बीच 31.4 किमी नई रेल लाइन 
  2. बीकानेर- रतनगढ़ के बीच 125 किमी 
  3. मालवी-नाथद्वारा के बीच 16 किमी 
डूंगरपूर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल लाइन परियोजना

  • बांसवाड़ा - डूंगरपुर - रतलाम रेलमार्ग हेतु राज्य सरकार की पहल से रेल मंत्रालय ने मंजूरी दी।  
  • 3 जून , 2011 का यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजस्थान में दक्षिण क्षेत्र के लिए उत्तर - पश्चिम रेल लाइन के तहत उपरोक्त रेल लाइन का शिलान्यास किया।  यह रेल लाइन 176.4  किमी लम्बाई की है।  इस पर रु. 2982.15 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।  
  • बांसवाड़ा पहली बार रेल लाइन से जुड़ने जा रहा है।  देश  पहली बार किसी भी राज्य सरकार द्वारा ऐसी वृहद रेल परियोजना के लिए भूमि सहित रु. 1,250 करोड़ दिए जा रहे है।  
मेट्रो प्रोजेक्ट 

  • जयपुर में मेट्रो रेल परियोजना  का कार्य दो चरणों में पूरा होगा। शिलान्यास 14 फरवरी , 2011 केंद्रीय मंत्री कमलनाथ द्वारा किया गया।  
  • संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट अनुसार जयपुर मेट्रो के तहत सीतापुरा से अम्बाबाड़ी मार्ग तक प्रस्तावित 23.09 किमी के कॉरिडोर-द्वितीय पर रु. 6 हजार 583 करोड़ का खर्च प्रस्तावित है।  
  • इसी प्रकार मानसरोवर से बड़ी चौपड़ तक 12.067 किमी के कॉरिडोर-प्रथम पर रु. 3 हजार 149 करोड़ अनुमानित लागत आएगी।  
  • दोनों कॉरिडोर में 35.166 किमी की दूरी एवं 9732 करोड़ का खर्च प्रस्तावित है।  
  • जयपुर मेट्रो रेल परियोजना को 24 अगस्त , 2009 को आयोजित की बैठक में सैद्धान्तिक सहमति दी गई। 
  • इसके बाद 22 अप्रैल , 2010 को हुई मंत्रिमंडल  बैठक में परियोजना का 'पब्लिक प्राईवेट पार्टर्शीप मॉडल ' (पी. पी. पी.) पर क्रियान्वयन की रुपरेखा पर मोहर लगाई गई। 
  • कॉम्प्रिहेन्सिव मोबिसिटी प्लान जनवरी , 2010 के तथ्यों के आधार पर वर्ष 2014 में मेट्रो रेल को संचालित किया जाना चाहिए जबकि राज्य सरकार ने जून , 2013 में ही राजधानी में मेट्रो रेल के संचालन का लक्ष्य रखा है।  
  • बीते दशक में भारत को दो नई मेट्रो रेल सेवाएँ मिली और चालू दशक कम से कम 10 शहरों में मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। ये शहर है - लुधियाना ,चंडीगढ़ , दिल्ली ,एन. सी. आर. , जयपुर , लखनऊ , अहमदाबाद , भोपाल , कोलकाता ,इंदौर , मुंबई , पुणे , हैदराबाद , बेंगलुरु ,चैन्नई और कोच्ची।  इसमें दिल्ली , एन. सी. आर. , बेंगलुरु और कोलकता में 1984 में मेट्रो रेल सेवा शुरू हुई थी।  
  • अभी जिन शहरो में मेट्रो की शुरुआत होनी है , उसमे मुंबई सबसे आगे है , जहाँ मार्च , 2013 तक मेट्रो सेवा की शुरुआत हो गई है।  
  • दूसरे नम्बर पर जयपुर है ,जहाँ 2013 में शुरू होना है।  इसके बाद कोच्ची का नंबर आता है।  अगर हम जयपुर की बात करे ,तो राजस्थान सरकार ने दिल्ली मेट्रो को इसका ठेका अगस्त 2010 में दिया।  
  • सेवा की शुरुआत की निर्धारित तारीख 20 जून , 2013 है।  लेकिन वर्ष 2014 तक भी शुरू होने के आसार नहीं है।  

राज्य में रेलवे से सम्बंधित उपक्रम निम्न है-

(i) सिमको वैगन फैक्ट्री ,भरतपुर (Central India Machinery Manufacturing Co. -CIMCO ) :-
  • रेल वैगन बनाने वाली भरतपुर स्थित सिमको बिरला लिमिटेड सहप्रवर्तन टीटागढ़ (कोलकाता) ने इस दिशा में कवायद शुरू कर दी है।  
  • पहले दौर में फैक्ट्री में रेल इंजन का ढांचा तैयार किया जायेगा।  इसके सफल होने पर कुछ दिनों बाद ही पूरा रेल इंजन बनाया जायेगा।  
  • सिमको की स्थापना वर्ष 1957 में हुई थी तथा नवम्बर , 2000 को तालाबंदी हुई।  
  • यह 9 अक्टुम्बर , 2008 को पुनः चालू हुई है।  करीब आठ साल तालाबंदी का दंश झेल चुकी सिमको वैगन  फैक्ट्री को चितरंजन लोको से इलेक्ट्रिक व बनारस लोको से डीजल इंजन का ढांचा तैयार करने की अनुमति मिली है।  
  • उल्लेखनीय है कि रेल वैगन बनाने के साथ ही राज्य में रेल इंजन बनाने की सिमको बिरला एकमात्र फैक्ट्री होगी।  फैक्ट्री में सवारी कोच ईम्यू बनाने की भी तैयारियां चल रही है।  
(ii) पश्चिमी रेलवे क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र , उदयपुर :-
  • यह केंद्र 9 अक्टुम्बर 1965  को स्थापित किया गया था।  इस केंद्र में भारत का सबसे बड़ा रेलवे मॉडल कक्ष है।  

(iii) कोटा में खुलेगा रेलवे विघुत लोको शेड :-
  • रेलवे बोर्ड ने कोटा में विघुत लिखो शेड के लिए औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।     योजना को 2010 -11 के वित्तीय वर्ष में शामिल किया गया था।  विघुत लोको शेड रेल डिब्बा मरम्मत कारखाना (सोगरिया) के पास बनाया जायेगा।  इसकी क्षमता एक माह में 100 इंजन दुरस्त करने की होगी।  पश्चिम मध्य रेलवे का यह चौथा लोको शेड होगा।  इससे पहले नई कटनी ,तुगलकाबाद और इटारसी में विघुत लोको शेड की स्थापना हो चुकी है।                                                                  

(iv) भारतीय रेल अनुसन्धान एवं परीक्षण केंद्र :-
  • इस केंद्र का निर्माण पंचपद्रा (बाड़मेर) में किया जायेगा।  यहाँ तेजगति (180 किमी प्रति घंटा ) से चलने वाली ट्रेनों का परीक्षण किया जाएगा।  यहाँ से बालोतरा तक 27.5 किमी का आधुनिक रेलमार्ग बनाया जा रहा है।  

देश में रेल के इंजन व डिब्बे बनाने वाले कारखाने निम्नलिखित है -
  1. चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स : साधारण इंजन का निर्माण 
  2. डीजल लोकोमोटिव वर्क्स ,वाराणसी : साधारण इंजन का निर्माण 
  3. भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स ,भोपाल : विघुत रेल इंजन का निर्माण 
  4. इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ,पेरंबूर ,चेन्नई : सवारी डिब्बों का निर्माण 
  5. रेल कोच फैक्ट्री ,कपूरथला-पंजाब : सवारी डिब्बों का निर्माण 
  6. भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड ,बंगलौर :सवारी डिब्बों का निर्माण 
  7. जेस्सोप्स कोलकाता : रेल डिब्बे व विघुत इंजन निर्माण 


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