Bal Manovigyan / Bal Vikas Kya hai ?

Bal Manovigyan / Bal Vikas Kya hai ?  बालक की जीवन यात्रा और विकास माँ के गर्भ में आने के साथ ही प्रारम्भ हो जाती है। बालक माँ के गर्भ में एक पौधे की तरह छोटे से अंकुर के रूप में अपना जीवन प्रारम्भ करता है तथा धीरे-धीरे विकास की ओर बढ़ता है। बालक छोटे से निषेचित अण्डे से धीरे-धीरे पूर्ण अवस्था को प्राप्त कर लेता है।
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Bal Manovigyan / Bal Vikas Kya hai ?

बाल मनोविज्ञान (Child Psychology)

बाल मनोविज्ञान बालक के मन व स्वभाव का अध्ययन करता है अर्थात बाल मनोविज्ञान बालक का मनोवैज्ञानिक अध्ययन है।  
मानव विकास का अध्ययन मनोविज्ञान की जिस शाखा के अन्तर्गत किया जाता है , उसे बाल मनोविज्ञान (Child Psychology) कहते हैं। बाल मनोविज्ञान के द्वारा जब अध्ययन का क्षेत्र गर्भावस्था से किशोरावस्था व परिपक्वास्था तक होने लगा , तो आज बाल मनोविज्ञान को 'बाल विकास' कहा जाने लगा।  जब अध्ययन का क्षेत्र बाल मनोविज्ञान के द्वारा बालक के मन व व्यवहारों को भलीभाँति समझा जा सकता है। बालक की स्मृति का कितना विकास हुआ और जीवनकाल की किन परिस्थितियों से क्या प्रेरणा ग्रहण करता है ? आदि प्रश्नों का उतर ढूँढना ही बाल मनोविज्ञान का उद्देश्य है।  

बाल विकास का इतिहास ( History of Child Sociology ) 
Bal Vikas ka Itihas 

विश्व में सन 1979 से 'विश्व अन्तर्राष्ट्रीय बाल दिवस' मनाया जा रहा है। बाल विकास बाल मनोविज्ञान का आधुनिक या विस्तृत रुप है। बालक की शारीरिक , मानसिक , बौद्धिक , भावनात्मक , सामाजिक आदि पक्षों में परिपक्वता बाल विकास कहलाता है।  17 वीं सदी तक बालक के विकास के अध्ययन को कोई महत्व नहीं दिया जाता था परन्तु प्राचीनकाल में ही कही। दार्शनिक बालक के विकास के अध्ययन के लिए निरन्तर प्रयासरत रहे।  
प्लेटो (यूनान) (427-344 ई. पू.) ने अपनी पुस्तक ' The Republic' में इस तथ्य को स्वीकार किया कि बाल्यावस्था के प्रशिक्षण का प्रभाव बालक के बाद की व्यावसायिक दक्षताओं पर और समायोजन पर पड़ता है।  
1628 ई. (सत्रहवीं शताब्दी) में 'जोहन अमोस कमेनियस' (John Amos Comenious) ने धनी आयु वर्ग के बच्चों के लिए इटली में 'School of Infancy' (बचपन की स्कूल) की स्थापना की और लगभग 29 वर्षों के अथक प्रयास से 1657 में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Orbic Victous  रचना की। जो 1659 ई. में प्रकाश में आई।  इस पुस्तक में इन्होंने सभी वर्ग के बच्चों के शैक्षिक विकास का विवरण दिया।  जिनमे बालक की प्राथमिक शिक्षा एवं पाठ्यसामग्री को चित्रों के माध्यम से आकर्षक बनाया तथा मुख्य विषय-वस्तु को जोड़ा गया। इससे विद्वानों के ध्यान का आकर्षक बालक बना।  
बालक के विकास का प्रथम बार वैज्ञानिक विवरण 18 वीं शताब्दी (1774 ई.) में 'पेस्टॉलॉजी' ने प्रस्तुत किया। इनका यह विवरण अपने स्वयं के साढ़े तीन वर्षीय पुत्र पर 'बेबी बायोग्राफी' (बाल कथा) पर आधारित था। जर्मनी के चिकित्सक डॉ. टाइडमैन ने भी 1784 ई. में अपने बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास का निरिक्षण कर एक विवरण दिया था।  
19 वीं शताब्दी में अमेरिका में 'बाल-अध्ययन' आन्दोलन की शुरूआत हुई।  'स्टेनली हॉल' (इस आंदोलन के जन्मदाता) ने 1893 ई. (19 वीं शताब्दी) में इस आंदोलन  शुरुआत की थी। इन्होंने Child Study Society (बाल अध्ययन समिति) तथा Child Welfare Organizations (बाल कल्याण संगठन) जैसी संस्थाओं की स्थापना की तथा Biography भी तैयार की।  

Note :- भारत में बाल विकास के अध्ययन की शुरूआत लगभग 1930 में कोलकाता विष्वविधालय में हुई।  

बाल विकास की परिभाषाएँ (Bal vikas ki paribhasha)

  • जेम्स ड्रेवर के अनुसार , " विकास प्राणी में होने वाला प्रगतिशील परिवर्तन है जो निश्चित रूप से किसी लक्ष्य की और लगातार निर्देशित होता रहता है। उदाहरण के रूप में किसी भी जाति में भ्रूण अवस्था से लेकर प्रौढ़ावस्था तक परिवर्तन है। "
  • हरलॉक के अनुसार , " विकास की सीमा अभिवृद्धि तक ही नहीं है अपितु इसमें प्रौढ़ावस्था  लक्ष्य की ओर प्रगतिशील क्रम निधि रहता है। विकास के परिणामस्वरूप व्यक्ति में अनेक नवीन विशेषताएँ एवं नवीन योग्यताएँ स्पष्ट होती है। "
  • बर्क के अनुसार , " बाल विकास मनोविज्ञान की वह शाखा है जिसमें जन्म पूर्व अवस्था से परिपक्वता अवस्था तक होने वाले विकास का अध्ययन किया जाता है। "
  • क्रो एवं क्रो के अनुसार , " बाल विकास वह वैज्ञानिक अध्ययन है जिसमें गर्भावस्था के प्रारम्भ से किशोरावस्था के प्रारम्भ तक होने वाले विकास का अध्ययन किया जाता है। "
उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि बाल विकास वह शाखा है जिसमें गर्भावस्था से परिपक्वावस्था तक होने वाले विकास का अध्ययन किया जाता है।  

IMPORTANT POINTS
  • प्रथम बाल गृह की स्थापना सन 1887 में न्यूयॉर्क (अमेरिका) में बाल अपराधियों को सुधारने के लिए हुई।  
  • गेसेल (GESELL , 1928) ने 'Infancy and Human Growth' तथा 'Guidance of Mental Growth' नामक पुस्तक का प्रकाशन 1930  में करवाया।  
  • जीन पियाजे (स्विट्जरलैंड) ने बाल मनोविज्ञान पर सर्वाधिक 32 पुस्तकों की रचना की। इनमें से कुछ प्रमुख - Language and Thought ऑफ़ थे Child ( बालक का चिंतन और भाषा) , 1926 ; Child Conception of the world (संसार के बच्चो के विचार) , 1920  ; Moral Judgement of the Child ( बच्चो के नैतिक निर्णय) . 1930 आदि है।  
  • इंग्लैंड में सली ने British Association for Child Study की स्थापना की।  
  • बालक के अध्ययन सम्बन्धी प्रथम पत्रिका का प्रकाशन स्टेनली हॉल ने 'Pedalogical Seminar' का प्रकाशन प्रारम्भ करवाया।  
  • डार्विन ने 'Biographical Sketch of an Infant' नामक पुस्तक प्रकाशित की।  
  • प्रेयर ने अपने नवजात पुत्र की सहज क्रियाओ का विकास तथा अनुभव का अध्ययन कर 'Mind of the Child' नामक पुस्तक लिखी।  
  • बाल अपराध जैसे व्यवहारों के निदान के लिए विलियम हिली ने 1909 में शिकागो में प्रथम बाल निर्देशन क्लिंनिक खोला।  बाद में यह सेवा केंद्र विलय हो गया , वर्तमान में इसका परिवर्तित रूप विद्यालयों में कैरियर डे के रूप में जाना जाता है।  


बाल मनोविज्ञान एवं बाल विकास में अंतर 

" बाल मनोविज्ञान के स्थान पर बाल-विकास नाम इसलिए परिवर्तित हुआ क्योंकि विकास के कुछ पक्षों की अपेक्षा बाल-विकास के ढंग के अध्ययन पर बल दिया जाने लगा।  " श्रीमती हरलॉक के इस कथन के अनुसार मुख्य अंतर निम्न हैं- 
  • बाल मनोविज्ञान में बालक का व्यवहार जिस वातावरणीय परिवेश में होता है , उन पर कम ध्यान दिया जाता है। जबकि बाल-विकास में वातावरण के प्रभावों को विशेष रूप से देखा जाता है। 
  • बाल मनोविज्ञान विकास , व्यवहार या विषय वस्तु पर अधिक ध्यान देता है जबकि बाल-विकास उसकी प्रक्रिया पर बल देता है।  
  • बाल मनोविज्ञान में गर्भावस्था से बाल्यावस्था पर ही विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है जबकि बाल-विकास में गर्भावस्था से किशोरावस्था तक का अध्ययन किया जाता है।  


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