शब्द विचार-परिभाषा , भेद और उदाहरण | हिंदी व्याकरण

हिंदी व्याकरण के मुख्यतः तीन अंग होते है - अक्षर(वर्ण विचार) , शब्द विचार और वाक्य विचार। आज हम हिंदी व्याकरण के दूसरे भाग शब्द विचार की चर्चा करेंगे।  इसमें हम जानेंगे कि शब्द क्या है , शब्द की परिभाषा , शब्द विचार में शब्द क्या है ? , शब्द के भेद ;यथा - प्रयोग के आधार पर शब्द के भेद, अर्थ के आधार पर शब्द विचार आदि। 


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शब्द विचार-परिभाषा , भेद और उदाहरण | हिंदी व्याकरण



  शब्द विचार-परिभाषा , भेद और उदाहरण | हिंदी व्याकरण


शब्द की परिभाषा (शब्द विचार की परिभाषा) 

  • शब्द (शब्द विचार) की परिभाषा :- एक या एक से अधिक वर्णो से बने सार्थक ध्वनि-समूह को शब्द कहते है। अर्थात वर्णो के सार्थक समूह को शब्द कहते है।  जैसे- सूरज , कमल , दीपक आदि। 
  • यदि वर्णो का समूह निरर्थक है जैसे - मकल आदि ,तो यह शब्द नहीं होते है।  


शब्दों के भेद : - 

शब्द के अर्थ , उत्पत्ति या स्रोत , रचना या बनावट , प्रयोग के आधार पर शब्दों को निम्नलिखित भेदों में बाँटा गया है -

  1. प्रयोग के आधार पर शब्दों के भेद 
  2. उत्पत्ति एवं स्रोत के आधार पर  शब्दों के भेद 
  3. रचना या बनावट के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण 
  4. अर्थ के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण (भेद) 

प्रयोग के आधार पर शब्दों के भेद 
प्रयोग के आधार पर हिंदी में  शब्दों(शब्द विचार) के दो भेद माने गए है।  
  1. विकारी शब्द 
  2. अविकारी शब्द 
1. विकारी शब्द :- वे जिनके रूप में लिंग , वचन , कारक व काल के अनुसार परिवर्तन होता है , उसे विकारी शब्द कहते है। विकारी शब्द चार प्रकार के होते है-  संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण तथा क्रिया। 

2. अविकारी शब्द :- वे शब्द जिनके रूप में लिंग , वचन , कारक और काल के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता है अर्थात शब्द का रूप सदैव वही रहता है , उसे अविकारी शब्द कहते है।  अविकारी शब्दों को 'अव्यय' भी कहते है। 
अविकारी शब्द चार प्रकार के होते है - क्रियाविशेषण , सम्बन्धबोधक ,  समुच्चयबोधक , विस्मयादिबोधक। 


उत्पत्ति के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण 
उत्पत्ति के आधार पर हिंदी भाषा में निम्न 5 भेद होते है -
  1. तत्सम शब्द 
  2. तदभव शब्द 
  3. देशज शब्द 
  4. विदेशी शब्द 
  5. संकर शब्द 
1. तत्सम शब्द :- किसी भाषा में प्रयुक्त उसकी मूल भाषा के शब्दों को तत्सम शब्द कहते है। अर्थात वे संस्कृत शब्द जो हिंदी में ज्यों के त्यों प्रयुक्त होते है , उन्हें तत्सम शब्द कहते है।  
जैसे - अट्टालिका , अर्पण , आम्र , उष्ट्र , कर्ण , गर्दभ , क्षेत्र आदि।  
तत्सम शब्दों की कुछ पहचान :- 
  • संयुक्ताक्षर (क्ष , त्र , ज्ञ , श्र ) वाले शब्द प्रायः तत्सम होते है।  
  • रेफ वर्ग (कृ , क्र , र्क) वाले शब्द तत्सम होते है।  
  • ऋ , ण , ष वाले शब्द तत्सम होते है।  जैसे - पुरुष , ऋषि , पुराण , गण , रामायण आदि।  
  • ङ और ञ पृथक रूप से आये तो शब्द तत्सम होते है।  
  • क्ष और  ज्ञ वाले शब्द तत्सम होते है।  

2. तदभव शब्द :-  वे शब्द जो संस्कृत से उत्पन्न होकरउनका परिवर्तित रूप हिंदी में आ गए , तदभव शब्द कहते है।  अर्थात उच्चारण की सुविधानुसार  संस्कृत के वे शब्द , जिनका हिंदी में रूप परिवर्तित हो गया है , वे हिंदी भाषा के तदभव शब्द कहलाते है। 
जैसे - आम , हल्दी , मक्खी , आग , दूध आदि।  
तदभव शब्दों की कुछ पहचान :- 
  • ड़ , ढ़ वाले शब्द तदभव होते है।  
  • चन्द्रबिन्दु युक्त शब्द सदैव तदभव होते है।  

3. देशज शब्द :- किसी भाषा में प्रचलित वे शब्द जो क्षेत्रीय जनता द्वारा आवश्यकता पड़ने पर अपने अनुसार गढ़ लिए जाते है , देशज शब्द कहलाते है। अर्थात क्षेत्रीय भाषा के अपने शब्दों को देशज शब्द कहते है।  साथ ही वे शब्द भी देशज शब्दों की श्रेणी में आ जाते है , जिनके स्रोत का कोई पता नहीं है तथा हिंदी में भारतीय भाषाओ से आ गए है। 
जैसे - ऊटपटाँग , कंजड़ , खटपट , परात , पटाखा , पगड़ी , पेट , केला , कटी , चिकना , लूँगी , कोड़ी , ताम्बूल बाजरा आदि।  

4. विदेशी शब्द :-  धार्मिक , सांस्कृतिक , आर्थिक और राजनीतिक कारणों से हिंदी भाषा में अन्य देशों भाषाओं से भी  शब्द आ जाते है , उन्हें विदेशी शब्द कहते है। हिंदी भाषा में अरबी , फ़ारसी , चीनी , तुर्की , अंग्रेजी , पुर्तगाली , फ़्रांसिसी भाषाओं के अतिरिक्त जापानी , रुसी , यूनानी , डच , तिब्बती , जर्मनी भाषा के शब्द भी प्रयुक्त होते है। 
जैसे - 
अंग्रेजी भाषा के शब्द :- अंडरवियर , अलमारी, क्लास ,रेल , वारंट , शर्ट , स्कूटर आदि। 
अरबी भाषा  के शब्द :- इनाम , इस्तीफा , जिला , फकीर , नशा , हिम्मत आदि। 

5. संकर शब्द :- हिंदी भाषा में वे शब्द जो दो भिन्न-भिन्न भाषाओ के शब्दों को मिलाकर बना लिये गये है , संकर शब्द कहलाते है।
जैसे - अग्निबोट (अग्नि शब्द संस्कृत तथा बोट शब्द अंग्रेजी भाषा का है।) , टिकिट-घर , तपैदिक , नेक नीयत आदि।  


बनावट या रचना के आधार पर शब्दों के प्रकार 
रचना प्रकिया के आधार पर हिंदी भाषा के शब्दों के तीन भेद होते है - 
  1. रूढ़ शब्द 
  2. यौगिक शब्द 
  3. योग रूढ़ शब्द 
1. रूढ़ शब्द :- वे हिंदी भाषा के शब्द जो किसी व्यक्ति, स्थान , प्राणी और वस्तु के लिए वर्षों से प्रयुक्त होने के कारण किसी विशिष्ट अर्थ में प्रचलित हो गए है , उन्हें रूढ़ शब्द कहते है। इन  शब्दों की निर्माण प्रक्रिया भी पूर्णतः ज्ञात नहीं होती।  इनका कोई अन्य अर्थ भी नहीं होता है तथा इन शब्दों के टुकड़े करने पर भी उन टुकड़ो के स्वतंत्र अर्थ नहीं होते है। जैसे - दूध , गाय , रोटी , दीपक , स्री , पत्थर आदि। 

2. यौगिक शब्द :- वे हिंदी भाषा के शब्द जो दो या दो से अधिक शब्दों के योग से बने है। उन शब्दों का अपना पृथक अर्थ भी नहीं होता है लेकिन वे मिलकर अपने मूल शब्द से सम्बंधित या अन्य किसी नए अर्थ का भी बोध कराते है , उन्हें यौगिक शब्द कहते है।  समस्त संधि , समास , उपसर्ग तथा प्रत्यय से बने शब्द यौगिक शब्द कहलाते है।  जैसे - विद्यालय , कृष्णार्पण , चिड़ीमार , ईश्वर-प्रदत  आदि।  

3. योगरूढ़ शब्द :- वे यौगिक शब्द जिनका निर्माण अलग-अलग अर्थ देने वाले शब्दों के योग से होता है , लेकिन वे अपने द्वारा प्रतिपादित अनेक अर्थों में से किसी एक विशेष अर्थ के लिए ही प्रयुक्त होकर रूढ़ हो गए है , ऐसे शब्दों को योगरूढ़ शब्द  कहते है।  
जैसे - पीताम्बर शब्द 'पीत' और 'अम्बर' के योग से बना है , जो विष्णु के अर्थ में रूढ़ है।  इसी प्रकार हिमालय , मुरारि , दशानन , जलज , जलद , गजानन , लम्बोदर , त्रिनेत्र , चतुर्भुज आदि। 


अर्थ के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण 
अर्थ के आधार पर शब्दों के मुख्यत: दो भेद होते है-
  1. सार्थक शब्द 
  2. निरर्थक शब्द 
1.  सार्थक शब्द :- वे शब्द जिनका कोई सार्थक अर्थ निकलता हो , सार्थक शब्द कहलाते है। जैसे - कमल , नयन , राम , कुर्सी आदि।  

2. निरर्थक शब्द :- वे शब्द जिनका कोई सार्थक अर्थ नहीं निकलता है , निरर्थक शब्द कहलाते है।  जैसे - मकाल , नमल , रषिकु आदि। 

अर्थ के आधार पर शब्दों के अन्य भेद निम्नलिखित है- 
  1. एकार्थी शब्द 
  2. अनेकार्थी शब्द 
  3. पर्यायवाची शब्द 
  4. विलोम शब्द 
  5. समोच्चारित शब्द या युग्म शब्द 
  6. शब्द समूह के लिए एक शब्द 
  7. समानार्थक प्रतीत होने वाले भिन्नार्थक शब्द 
  8. समूहवाची शब्द 
  9. ध्वन्यार्थक शब्द 
1. एकार्थी शब्द :- वे शब्द जिनका प्रयोग प्रायः एक ही अर्थ में होता है , एकार्थी शब्द कहलाते है। जैसे - दिन , धुप , आज , लड़का , पहाड़ , नदी आदि। 

2. अनेकार्थी शब्द :- वे शब्द जिनके एक से ज्यादा अर्थ  होते है , तथा उनका प्रयोग भिन्न-भिन्न अर्थ में किया जा सकता है , अनेकार्थी शब्द कहलाते है। जैसे- अज , हरि , सारंग , कर , अमृत आदि अनेकार्थी शब्द है।  

3. पर्यायवाची शब्द :- वे शब्द जिनका अर्थ एक जैसा (समान) होता है। अर्थात एक ही शब्द के अनेक समानार्थी शब्द को पर्यायवाची कहते है।  जैसे - सूर्य , भानु , रवि , दिनेश , भास्कर आदि शब्द सूर्य के समानार्थी या पर्यायवाची शब्द है।  

4. विलोम शब्द :- वे शब्द जो एक दूसरे का विपरीत अर्थ देते है , उन्हें विलोम या विपरीतार्थक शब्द कहते है।  जैसे: रात-दिन , सुबह-शाम , जय-पराजय , आशा-निराशा , सुख-दुःख  आदि। 

5. युग्म शब्द या समोच्चारित शब्द :- वे शब्द जिनका उच्चारण समान प्रतीत  है  लेकिन अर्थ बिलकुल भिन्न होता है।  ऐसे शब्दों को युग्म शब्द / समरूपी भिन्नार्थक शब्द / समोच्चारित शब्द कहते है।  जैसे ; अनल-अनिल उच्चारण में एक जैसे है लेकिन अनल का अर्थ है- आग।  तथा अनिल का अर्थ है -हवा।  

6. शब्द समूह के लिए एक शब्द :- वे शब्द जो किसी वाक्य , शब्द समूह या वाक्यांश के लिए एक शब्द बन कर प्रयुक्त होते है , उन्हें उस वाक्य , शब्द समूह या वाक्यांश के लिए प्रयुक्त 'एक शब्द' कहते है। जैसे : जिसका कोई शत्रु न हो - अजातशत्रु। 

7.  समानार्थक प्रतीत होने वाले भिन्नार्थक शब्द :- वे शब्द जो सामान्य रूप में समान अर्थ वाले प्रतीत होते है , लेकिन उनमें अर्थ का इतना सूक्ष्म अन्तर होता है की उन्हें भिन्न-भिन्न वाक्यों में प्रयुक्त करना पड़ता है। जैसे : अस्त्र -शस्त्र।  'अस्त्र' शब्द उन हथियारों  प्रयुक्त होता है जिन्हे फेंक कर चलाया जाता है। जबकि 'शस्त्र' हाथ में  रख कर प्रयुक्त किया जाता है।  
जैसे - तीर , बम , बन्दुक आदि अस्त्र है जबकि लाठी , तलवार , चाकू , भाला आदि शस्त्र है।  

8. समूहवाची शब्द :- वे शब्द जो किसी एक समूह का बोध कराते है , उन्हें समूहवाची शब्द कहते है।  जैसे - गट्ठर (लकड़ी या पुस्तकों का) , गुच्छा (चाबियाँ या अंगूर का) , गिरोह (माफिया या डाकुओ का) , जोड़ा (जूतों का , हंसो का) , जत्था (यात्रियों का , सत्याग्रहियों का) , झुण्ड (पशुओं का) , टुकड़ी (सेना की) , ढेर (अनाज का) , पंक्ति ( मनुष्यो , हंसो की) , भीड़ (मनुष्यो की) , माला ( फूलो की) , शृंखला (मानव , लौह) , रेवड (भेद व बकरियों का) , समूह (मनुष्यो का)  . 

9. ध्वन्यार्थक शब्द :- वे ध्वन्यात्मक शब्द जिनका अर्थ ध्वनियों पर आधारित होता है।  ध्वन्यार्थक शब्द कहलाते है।  
इनके निम्न उपभेद होते है- 
(क) पशुओं की बोलियाँ :- किलकिलाना (बन्दर) , गुर्राना(चीता) , दहाड़ना (शेर) , भौकना (कुत्ता) , रेंकना (गंधा) , हिनहिनाना (घोड़ा) , डकारना (बेल) , चिंघाड़ना (हाथी) , फुँफकारना (साँप) , मिमियाना (भेड़, बकरी) , रम्भाना(गाय) , गुंजारना ( भौंरा) , टर्राना (मेंढक) , म्याऊ (बिल्ली) , बलबलाना (ऊँट) , हुआ-हुआ (गीदड़) 
(ख) पक्षियों की बोलियाँ :- कूजना (बतख , कुरजां) , कूकडूकूं (मुर्गा) , चीखना (बाज) , हू-हू (उल्लू) , काँव-काँव (कौवा) , गुटरगूँ (कबूतर) , टें-टें (तोता) , कुंहकाना (कोयल) , चहचहाना (चिड़िया) , मेयो-मेयो (मोर )
(ग) जड़ पदार्थो की ध्वनियाँ :- कड़कना ( बिजली) , खटखटाना (दरवाजा) , छुक-छुक ( रेलगाड़ी) , टिक-टिक (घडी) , गरजना (बादल) , किटकिटाना (दाँत) , खनखनाना (रुपया) , टनटनाना (घंटा) , फड़फड़ाना (पंख) , खड़खड़ाना (पत्ते) 
(घ) अन्य शब्द :- छलछलाना , लहलहाना , दमदमाना , चमचमाना , जगमगाना , फहराना , लपलपाना। 


हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद !  इसमें आपको शब्द क्या है , शब्द की परिभाषा , शब्द विचार में शब्द क्या है ? , शब्द के भेद ;यथा - प्रयोग के आधार पर शब्द के भेद, अर्थ के आधार पर शब्द विचार  आदि  के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है।

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