वाक्य : परिभाषा, अंग और भेद | vakya vichar in hindi

 वाक्य क्या है ? वाक्य को कैसे परिभाषित करे। ये सवाल हर किसी के मन में आता है। इसलिए हिंदी व्याकरण में आज हम आपको इस पोस्ट में  वाक्य की  परिभाषा, वाक्य के अंग,  वाक्य  के भेद( जिसमें क्रिया की दृष्टि से वाक्य के प्रकार , अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद , रचना के आधार पर वाक्य के प्रकार ) ,  वाक्य  के उदाहरण, हिंदी में वाक्य का प्रयोग आदि के बारे में संक्षिप्त जानकारी देंगे। 

  

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वाक्य क्या है ?

वाक्य की परिभाषा:- भाषा की सबसे छोटी वर्ण है। वर्णो के सार्थक समूह को शब्द कहते है तथा शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते है।  अर्थात वाक्य शब्द-समूह का वह सार्थक विन्यास होता है , जिससे उसके अर्थ एवं भाव की पूर्ण एवं सुस्पष्ट अभिव्यक्ति होती है। अतः वाक्य में आकांक्षा , योग्यता, आसक्ति एवं क्रम का होना आवश्यक है।  

वाक्य के अंग  

सामान्य वाक्य के दो अंग माने गए है- 

  1. उद्देश्य 
  2. विधेय 
1. उद्देश्य :- जिसके बारे में वाक्य में कहा जाता है , उसे उद्देश्य कहते है। अतः कर्त्ता ही वाक्य में 'उद्देश्य' का कार्य करता है , किन्तु यदि कर्त्ता कारक के साथ उसका कोई विशेषण प्रयुक्त हो , तो उसे कर्त्ता का विस्तारक कहते है, और वह भी उद्देश्य के ही अंतर्गत आता है। जैसे- 
  • मेरा भाई नरेंद्र धार्मिक पुस्तकें अधिक पढता है। 
इस वाक्य में 'मेरा भाई नरेंद्र' उद्देश्य है, जिसमें 'नरेंद्र' कर्त्ता है तो 'मेरा भाई' नरेंद्र कर्त्ता का विशेषण अर्थात इसे कर्त्ता का विस्तारक कहेंगे। 

2. विधेय :- उद्देश्य अर्थात कर्त्ता के बारे में वाक्य में जो कुछ भी कहा जाता है , उसे 'विधेय' कहते है। अतः विधेय के अंतर्गत वाक्य में प्रयुक्त कर्म , कर्म का विस्तारक , क्रिया , क्रिया का विस्तारक , पूरक तथा पूरक का विस्तारक, आदि आते है। जैसे-  
  • श्याम धार्मिक पुस्तकें अधिक पढ़ता है। 
इस वाक्य के अंतर्गत आने वाक्यांश 'धार्मिक पुस्तके अधिक पढता है' वाक्य का विधेय है, जिसमें 'पढता है' क्रिया है, तो 'अधिक' शब्द क्रिया का विस्तारक है(जो क्रिया की विशेषता को बतलाता है, क्रिया का विस्तारक कहलाता है।) , 'पुस्तके' शब्द वाक्य में कर्म है तो 'धार्मिक' शब्द पुस्तकों की विशेषता बतलाने के कारण धार्मिक 'कर्म का विस्तारक' है। इनके अतिरिक्त जब वाक्य में क्रिया अपूर्ण होती है या यदि अन्य कोई शब्द प्रयुक्त होता है या  तो उसे 'पूरक' कहते है तथा 'पूरक' की विशेषता बतलाने वाले शब्द को ही 'पूरक का विस्तारक' कहते है। 


वाक्य के भेद :-

क्रिया , अर्थ तथा रचना के आधार पर वाक्यों के निम्नलिखित भेद प्रभेद में बाँटा जाता है -

क्रिया के आधार पर भेद :- क्रिया की दृष्टि से वाक्य के तीन भेद होते है। 

  1. कर्त्तृवाच्य प्रधान 
  2. कर्मवाच्य प्रधान 
  3. भाव वाच्य प्रधान 
1. कर्त्तृवाच्य प्रधान :- जब वाक्य में प्रयुक्त होने वाली क्रिया का प्रधान व सीधा सम्बन्ध कर्त्ता से होता है अर्थात क्रिया के लिंग , वचन दोनों कर्त्ता कारक के अनुसार प्रयुक्त होते है , उसे कर्त्तृवाच्य प्रधान वाक्य कहते है।  जैसे -
  • रविंद्र पुस्तक पढ़ता है।  
  • आरती पुस्तक पढ़ती है।  

2. कर्मवाच्य प्रधान :- जब वाक्य में प्रयुक्त होने वाली क्रिया का प्रधान व सीधा सम्बन्ध कर्म से होता है अर्थात क्रिया के लिंग , वचन दोनों कर्त्ता कारक के अनुसार न होकर कर्म कारक के अनुसार प्रयुक्त होते है , उसे कर्मवाच्य प्रधान वाक्य कहते है।  जैसे -
  • महेंद्र ने गाना गाया। 
  • वर्षा ने गाना गाया। 

3. भाव वाच्य प्रधान :- जब वाक्य में प्रयुक्त होने वाली क्रिया न तो कर्त्ता के अनुसार , न ही कर्म के अनुसार प्रयुक्त होती है बल्कि भाव के अनुसार प्रयुक्त होती है, तो उसे भाव वाच्य प्रधान वाक्य कहते है।  जैसे -
  • हेमराज से पढ़ा नहीं जाता।  
  • जया से पढ़ा नहीं जाता।  

अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद :- अर्थ के आधार पर वाक्य को 8 भेद बाँटा जाता है। 

  1. विधानार्थक वाक्य 
  2. निषेधात्मक वाक्य 
  3. आज्ञार्थक वाक्य 
  4. प्रश्नार्थक वाक्य 
  5. इच्छार्थक वाक्य 
  6. सन्देहार्थक वाक्य 
  7. संकेतार्थक वाक्य 
  8. विस्मय बोधक वाक्य 

1. विधानार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में किसी कार्य या बात का होना पाया जाता है , उसे विधानार्थक वाक्य कहते है।  जैसे - 
  • भूपेंद्र खेलता है।  
2. निषेधात्मक वाक्य :- जिस वाक्य में किसी विषय के अभाव का या किसी बात के न होने बोध हो, उसे निषेधार्थक वाक्य कहते है। जैसे - 
  • नीता घर पर नहीं है। 
3. आज्ञार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में किसी दूसरे के द्वारा उपदेश, आदेश या आज्ञा देने का बोध हो , उसे आज्ञार्थक वाक्य कहते है। जैसे - 
  • निशा , तुम गाना गाओ। 
4. प्रश्नार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में किसी कार्य या विषय सम्बन्ध में प्रश्न पूछने का बोध हो ,अर्थात प्रश्नात्मक भाव प्रकट हो , उसे प्रश्नार्थक वाक्य कहते है।  जैसे-
  • कौन गाना गा रही है?
  • तुम कहाँ जा रहे हो ?
5. इच्छार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में आशीर्वाद या इच्छा के भाव का बोध हो, उसे इच्छार्थक वाक्य कहते है। जैसे -
  • ईश्वर करे , तुम्हारा भला हो। 
6. सन्देहार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में संदेह या सम्भावना का बोध हो उसे सन्देहार्थक वाक्य कहते है। जैसे -
  • उन दोनों में जाने , कौन खेलेगा। 
7. संकेतार्थक वाक्य :- जिस वाक्य में शर्त या संकेत का बोध हो , उसे संकेतार्थक  वाक्य कहते है। जैसे-
  • यदि तुम पैसे दो तो मैं चलूँ। 
  • दूसरों का खुश करोगे तो तुम भी खुश रहोगे। 
8. विस्मय बोधक वाक्य :- जिस वाक्य से आश्चर्य,विस्मय आदि का भाव प्रकट हो , उसे विस्मयादिबोधक वाक्य कहते है। जैसे - 
  • वाह ! कैसा नयनाभिराम दृश्य है। 

रचना के आधार पर वाक्य के भेद :- रचना के आधार पर वाक्य को तीन भेद में बाँटा गया है। 

  1. साधारण वाक्य 
  2. मिश्र या मिश्रित वाक्य 
  3. संयुक्त वाक्य 
1. साधारण वाक्य :- जिस वाक्य एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय होते है , उसे साधारण वाक्य कहते है। जैसे - 
  • नीता खाना बना रही है। 
2. मिश्र या मिश्रित वाक्य :- जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य तथा एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य होते है,  उसे मिश्र या मिश्रित वाक्य कहते है। जैसे-
  • गाँधी जी ने कहा कि सदा सत्य बोलो। 
NOTE :-इस वाक्य में आश्रित तथा प्रधान उपवाक्य का निर्णय करने से पूर्व आश्रित एवं प्रधान उपवाक्यों के विषय में जान लेना अतिआवश्यक है। 

(अ) प्रधान उपवाक्य :- जो उपवाक्य मुख्य या प्रधान उद्देश्य और मुख्य विधेय से बना हो उसे 'प्रधान उपवाक्य' कहते है। ऊपर दिए हुए वाक्य में 'गाँधी जी ने कहा' प्रधान उपवाक्य है जिसमें 'गाँधी जी' प्रधान या मुख्य उद्देश्य है तो 'कहा' मुख्य विधेय। 

(आ) आश्रित उपवाक्य - जो उपवाक्य प्रधान उपवाक्य पर ही आश्रित रहता है , उसे आश्रित उपवाक्य कहते है। ऊपर दिए हुए वाक्य में 'कि सदा सत्य बोलो।' आश्रित उपवाक्य है। 
आश्रित उपवाक्य तीन प्रकार के होते है। 
(i) संज्ञा आश्रित उपवाक्य :- जब किसी आश्रित उपवाक्य का प्रयोग प्रधान उपवाक्य की किसी संज्ञा की जगह पर होता है तो उसे संज्ञा आश्रित उपवाक्य कहते है। 'संज्ञा आश्रित उपवाक्य' की शुरुआत प्रायः 'कि' शब्द से होती है। ऊपर दिए वाक्य में 'कि सदा सत्य बोलो' में 'कि' से प्रारम्भ होने के कारण संज्ञा आश्रित उपवाक्य कहलायेगा। 
(ii) विशेषण आश्रित उपवाक्य :- कोई आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य के किसी संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बताये तो उस उपवाक्य को 'विशेषण आश्रित उपवाक्य' कहते है। विशेषण उपवाक्य की शुरुआत प्रायः जिसकी , जो ,जिसका , जिसके आदि में से किसी शब्द से होता है।  जैसे -
  • जो विद्वान् होते है , उनका सभी आदर और समान करते है। 
(iii) क्रिया विशेषण आश्रित उपवाक्य :- जब कोई आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की क्रिया की विशेषता बताये या सूचना दे , तो उस आश्रित उपवाक्य को 'क्रिया विशेषण आश्रित उपवाक्य'  कहते है।  क्रिया विशेषण उपवाक्य प्रायः यदि , जहाँ , जैसे , यघपि , क्योंकि , जब , तब आदि में से किसी एक शब्द से शुरू होता है।  जैसे -
  • यदि हेमंत परिश्रम करता , तो अवश्य उत्तीर्ण होता। 
3. संयुक्त वाक्य :- जिस वाक्य दो या दो से अधिक प्रधान उपवाक्य या समानाधिकरण उपवाक्य या साधारण वाक्य हो तथा वे किसी संयोजक शब्द ( अथवा , और , परन्तु , लेकिन , किन्तु , तथा , एवं , या , बल्कि , अतः आदि ) से जुड़े हो , उसे संयुक्त वाक्य कहते है। जैसे -
  • सुरेश आया किन्तु भूपेंद्र चला गया। 
NOTE :- समानाधिकरण उपवाक्य :- ऐसे उपवाक्य जो प्रधान या आश्रित उपवाक्य के समान अधिकार वाला हो उसे समानाधिकरण उपवाक्य कहते है। 


हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद! इसमें आपको  वाक्य की  परिभाषा, वाक्य के अंग,  वाक्य  के भेद( जिसमें क्रिया की दृष्टि से वाक्य के प्रकार , अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद , रचना के आधार पर वाक्य के प्रकार ) ,  वाक्य  के उदाहरण, हिंदी में वाक्य का प्रयोग आदि  के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। 

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